..और पहाड़ पर नहीं चढ़ी ‘मोदी की रेल’

ऊना हमीरपुर रेल लाइन का होगा सर्वेक्षण

ऊना हमीरपुर रेल लाइन का होगा सर्वेक्षण

मोदी सरकार के रेल बजट में ऊना हमीरपुर रेल लाइन के सर्वेक्षण का फैसला लिया गया है। रेल बजट के दौरान इस रेलवे लाइन को उन 18 नई रेल लाइनों की सूची में डाला गया है जिनका सर्वेक्षण कर रेल लाइन बिछाने की योजना तैयार की जाएगी।

इसके अलावा हिमाचल के लिए नई रेल बिछाने या पर्यटकों को बढ़ावा देने के लिए कोई नई ट्रेन चलाने संबंधी कोई फैसला नहीं लिया गया। इस तरह हिमाचल का आधुनिक रेल नेटवर्क से जुड़ने का सपना एक बार फिर टूट गया।

..और पहाड़ पर नहीं चढ़ी ‘मोदी की रेल’

शिमलावासियों को सबसे ज्यादा निराशा

शिमलावासियों को सबसे ज्यादा निराशा

रेल बजट से शिमला के लोगों को भी खासी निराशा हाथ लगी है। उम्मीद थी कि कालका शिमला के लिए भी कोई अतिरिक्त ट्रेन चलाने या रेल लाइन के आधुनिकीकरण को लेकर घोषणा की जाएगी।

मगर ऐसा कुछ नहीं हुआ। यहां तक कि चंडीगढ़ से कालका तक भी कोई स्पेशल ट्रेन नहीं दी गई ताकि हिमाचल में पर्यटकों की आवाजाही बढ़ जाए।

सरकार ने चंडीगढ़ के लिए स्पेशल ट्रेनें दी मगर हिमाचल को इससे महरूम रख दिया।

पहाड़ की उम्मीदों पर खरें नहीं उतरे मोदी

पहाड़ की उम्मीदों पर खरें नहीं उतरे मोदी

पीएम नरेंद्र मोदी के पहले रेल बजट से हिमाचल को जो उम्मीदें थी वो पूरी नहीं हो पाई। महज एक घोषणा को छोड़कर हिमाचल के लिए कोई और फैसला नहीं लिया गया। मोदी से हिमाचल को बड़ी उम्मीदें थी। एक तो हिमाचल भाजपा प्रभारी के रूप में कई साल प्रदेश में बिताने वाले मोदी यहां की जरूरत को जानते थे और दूसरा मोदी खुद ये वादा कर गए थे कि हिमाचल को रेल विस्तार की जरूरत है?

मगर इसके बावजूद यहां पुराने रेल प्रोजेक्टों के सिरे चढ़ाने के लिए कोई खास योजना नहीं बनाई गई। वहीं, सामरिक महत्व की बिलासपुर-मनाली-लेह रेल लाइन पर भी कोई घोषणा नहीं की गई। इससे पहले भी कई वर्षों से रेल बजट में हिमाचल की अनदेखी होती रही है। जो नई रेल लाइनें सर्वे के लिए भी बजट में दिखाई जाती हैं, उनको भी बजट नहीं मिलता।

पढ़िए, क्या कहा था मोदी ने?

पढ़िए, क्या कहा था मोदी ने?

मेरे जीवन में हिमाचल का बड़ा महत्व है। यहां आकर ऐसा लगता है, जैसे अपने घर आया हूं। यहां से जाते ही गुजरात में बड़ी जिम्मेदारी मिली थी। हिमाचल को कुदरत ने खूब सुंदर बनाया है।

लेकिन यहां पर्यटन को विकसित करने की जरूरत है। ऐसा रेल विस्तार से ही हो सकता है। पहाड़ों की जरूरत अलग होती हैं। यदि मुझे आपकी सेवा का मौका मिला तो हिमालयी राज्यों के लिए अलग नीति बनाएंगे। चुनाव के दौरान मोदी ने यह भाषण हिमाचल में दिया था।

हीं चढ़ी ‘मोदी की रेल’प्रदेश सरकार ने भी उठाई अपनी मांगें

प्रदेश सरकार ने भी उठाई अपनी मांगें

रेल बजट से पहले केंद्र सरकार के सामने हिमाचल की कांग्रेस सरकार की ओर से मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह और भाजपा की ओर से सभी सांसदों ने अलग अलग पैरवी केंद्र सरकार में की थी। इनमें दो मुख्य मांगें रखी गई थी। पहले ये कि भानुपल्ली-बिलासपुर-बेरी रेल लाइन पर काम शुरू किया जाए। दूसरा कि इसे आगे मंडी-मनाली होते हुए लेह तक ले जाने के लिए राष्ट्रीय महत्व प्रोजेक्ट कैटेगिरी में डाला जाए।
हमीरपुर से भाजपा सांसद अनुराग ठाकुर ने ऊना से हमीरपुर रेल लाइन के सर्वे, नंगल-ऊना-तलवाड़ा रेल लाइन के लिए ज्यादा बजट देने, अंदौरा तक रेल लाइन के विद्युतीकरण, अंब में रेल की सफाई की सुविधा देने और नंगल तक आने वाली सभी रेल सेवाएं ऊना तक करने की मांग उठाई। पठानकोट आने वाले धौलाधार एक्सप्रेस की संख्या बढ़ाने और पठानकोट-जोगिंद्रनगर रेल लाइन को मंडी तक बढ़ाने की मांग भी की। लेकिन कुछ हाथ नहीं लगा।

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