…और दुल्हन के घर बितानी पड़ी रात

नई टिहरी। सोचा था यह था कि एक ही दिन में शादी की सारी रश्में निभाकर बारात शाम को घर लौट आएगी। लेकिन ऐसा हो नहीं पाया। सड़क बंद होने से बारात को दुल्हन के घर भटवाड़ा में ही रुकना पड़ा। उधर, बारात न पहुंचने से दूल्हे के घर कंडीसौड़ में परिजनों के माथे पर अनजानी आशंका की रेखाएं खिंची रही। संचार सुविधा भी ठप थी। ऐसे में बारात रुकने के बारे में भी सूचना नहीं दी जा सकी। रात होने से झील में बोट भी नहीं चलती कि उसके माध्यम से ही बारात लौट पाती। बुधवार को बारात के पहुंचने पर ही लोगों की सांस में सांस आई।
थौलधार प्रखंड के कंडीसौड़ निवासी बैसाखू के पुत्र राकेश की वनडे शादी भटवाड़ा धारमंडल निवासी शिव लाल की पुत्री सुषमा से 18 जून को थी। बारात के लिए वाहनों की व्यवस्था की थी। लेकिन बारिश से कंडीसौड़-चंबा एवं भल्डियाना-मोटणा मार्ग बंद होने से बारात मोटरबोट से झील के उस पार गई। जहां से आठ किमी पैदल चलकर भल्डियाना तक पहुंचे। फिर एक बार भल्डियाना से पीपलडाली तक मोटरबोट से आगे बढ़े। पिपलडाली से भटवाड़ा तक फिर 10 किमी पैदल दूरी नाप कर बारात करीब पांच बजे भटवाड़ा पहुंची। शादी के रस्मे पूरी करने में रात हो गई। उसके बाद वापसी का कोई विकल्प नहीं था। ऐसे में बारात को दुल्हन के घर पर ही रुकना पड़ा। इधर देर रात तक बारात की वापसी न होने पर कंडीसौड़ में दूल्हे के परिजनों और अन्य लोगों ने पूरी रात जागकर ही काटी। बुधवार को बाराती दुल्हन को लेकर 1.30 बजे कोटीकालोनी तक 15 किमी पैदल पहुंचे। इसके बाद पुनर्वास की बोट में बैठकर अपने घर को पहुंचे। जिसके बाद घर में फिर चहल-पहल शुरू हो पाई।

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