
धर्मशाला। जिला कांगड़ा के 800 से ज्यादा निजी स्कूलों में पढ़ रहे हजारों विद्यार्थियों की सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम नहीं है। जिले के अधिकतर स्कूलों की बसें नियमों को ताक पर रखकर दौड़ रही हैं। यही कारण है कि अभिभावकों को अपने लाडलों की हर दम चिंता रहती है। सोमवार को तप्पा गांव में रिजुल राणा (5) पुत्र अनिल राणा की स्कूली बस के पिछले टायर की चपेट में आने से मौत इसका ताजा उदाहरण है। बताया जा रहा है कि स्कूली बस में कोई परिचालक ही नहीं था। यह लापरवाही रिजुल राणा के परिजनों को ताउम्र न भूलने वाला गम दे गई है।
निजी स्कूल प्रबंधन मुनाफा कमाने के चक्कर में बिना परमिट के नियमों को ताक पर रखकर गाड़ियां चला रहे हैं। जिनमें स्कूली छात्रों की सुरक्षा रामभरोसे है। जिला कांगड़ा के हजारों छात्र रोजाना स्कूली बसों व गाड़ियों में स्कूल से घर और घर से स्कूल तक का सफर तय करते हैं। लेकिन, यह स्कूल वाहन किस हद तक सुरक्षित हैं, इसका जीता जागता उदाहरण बीते रोज पालमपुर क्षेत्र में एक मासूम की जान जाने के साथ पेश आया। जिला भर में चल रहीं स्कूल बसों में खामियों से स्कूल प्रबंधन भी बखूबी वाकिफ हैं। बावजूद इसके हजारों छात्रों की सुरक्षा के साथ सरेआम खिलवाड़ हो रहा है। वहीं, पुलिस और परिवहन विभाग भी बिना परमिट सड़कों पर सरपट दौड़ रहे वाहनों पर कार्रवाई करने से गुरेज कर रहे हैं। स्कूली बसों और गाड़ियों के शीशों पर लोहे की ग्रिल होना अति आवश्यक है। लेकिन, रोजाना ऐसे दर्जनों स्कूली वाहन सड़कों पर दौड़ते देखे जा सकते हैं, जिन पर किसी की कोई नजर नहीं पड़ती। शायद प्रशासन किसी बड़े हादसे के बाद ही हरकत में आएगा।
क्या हैं नियम
परमिट के लिए स्कूल प्रबंधन को विभिन्न नियमों का पालन करना होता है। जिनमें चालक को पांच वर्ष का अनुभव, बस में परिचालक होना अनिवार्य, शीशों पर ग्रिल होना, गाड़ी का सुरक्षित होना, एक दरवाजा होना, गाड़ी पर स्कूल का नाम होना और पीला रंग प्रमुख हैं। जिन्हें अधिकतर स्कूल प्रबंधन पूरा नहीं कर रहे हैं। जिसके चलते जिला कांगड़ा में अधिकतर स्कूल वाहन बिना परमिट के ही दौड़ रहे हैं।
निजी वाहन ढो रहे छात्रों को
जिला कांगड़ा में सैकड़ों निजी और प्राइवेट वाहन भी छात्रों को स्कूल से घर व घर से स्कूल छोड़ने में जुटे हुए हैं, जो किसी भी सूरत में किसी भी नियम को पूरा नहीं करते। बावजूद इसके स्कूल प्रबंधन नियमों को ताक पर रख और प्रशासन की आंखों में धूल झोंककर अपना काम चलाए हुए हैं।
परिजनों की भी लापरवाही
अधिकतर बच्चों के परिजन भी लापरवाही बरतते हैं। स्कूल गाड़ी के बारे में जानकारी होने के बावजूद वे अपने बच्चों को उसी बस में भेज रहे हैं। जबकि परिजनों को चाहिए कि वह स्कूल प्रबंधन के समक्ष इस मुद्दे को उठाएं।
क्या कहते हैं परिवहन अधिकारी
क्षेत्रीय परिवहन अधिकारी रतन गौतम का कहना है कि नियमानुसार विभाग की ओर से स्कूल बसों को परमिट दिए जाते हैं, लेकिन जिले में कुछ वाहन बिना परमिट के चल रहे हैं। जिन पर विभागीय कार्रवाई जारी है तथा जल्द ही इसे लेकर विशेष अभियान चलाया जाएगा। उन्होंने कहा कि सुबह व शाम को स्कूल बसों की रूटीन चेकिंग शुरू की जाएगी।
अवहेलना पर होंगे चालान : पुलिस
वहीं, जिला कांगड़ा के अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक मोहित चावला का कहना है कि नियमों की अवहेलना करने वाले स्कूल वाहनों के पुलिस द्वारा चालान किए जाएंगे, ताकि स्कूली छात्रों की सुरक्षा से खिलवाड़ न हो। उन्होंने कहा कि परिवहन निगम से भी इस बारे में बात की जाएगी।
