

करीब 307 करोड़ के इस प्रोजेक्ट के लिए केंद्र ने नगर निगम को करीब 23 करोड़ रुपये जारी भी किए हैं। जेएनएनयूआरएम की इस योजना को रद करने का फैसला सुनाते हुए केंद्र सरकार ने अब नगर निगम से 23 करोड़ की राशि आठ प्रतिशत ब्याज के साथ वापस लौटाने को कहा है।
वाटर प्रोजेक्ट के लिए 14 करोड़ और सीवरेज प्रोजेक्ट के लिए 9 करोड़ की राशि केंद्र सरकार ने जारी की थी।
नई सरकार की सिंचाई मंत्री विद्या स्टोक्स और शहरी विकास विभाग मंत्री सुधीर शर्मा ने आईपीएच और निगम अधिकारियों से प्रोजेक्ट को लेकर कई बैठकें भी की। प्रोजेक्ट को आउटसोर्स करने की बजाए निगम और आईपीएच के अधिकारियों को देने का फैसला तक लिया गया।
31 जुलाई 2013 को हुई कैबिनेट की बैठक में प्रोजेक्ट को ईपीसी पर देने का फैसला लिया गया। आईपीएच को डीपीआर बनाने के निर्देश दिए गए। इसी कड़ी में आईपीएच ने रिवाइज डीपीआर बनाई। जिसे शहरी विकास विभाग ने केंद्र सरकार को भेजा। इसे केंद्र सरकार ने अब रद कर दिया है।
24 घंटे मिलना था पीने का पानी

रिवाइज डीपीआर बनाते समय जनता को चौबीस घंटे पीने का पानी देने के प्रोजेक्ट का बजट 64.57 करोड़ बढ़ा। आईपीएच ने बजट 72.36 करोड़ से बढ़कर 136.93 करोड़ दर्शाया।
वहीं सीवरेज कनेक्टिविटी से छूट चुके क्षेत्रों तक लाइनें बिछाने और मिसिंग लिंक को जोड़ने वाले सीवरेज नेटवर्क प्रोजेक्ट का बजट 22.8 करोड़ बढ़ा। रिवाइज डीपीआर में बजट 147.55 करोड़ से बढ़कर 170.35 करोड़ हो गया। नगर निगम ने साल 2009 में सबसे पहले यह प्रोजेक्ट तैयार किया था।
क्या कहते हैं एमसी आयुक्त

चेताने के बाद भी नहीं संभले
मई 2013 में केंद्र सरकार के शहरी विकास मंत्रालय मंत्री कमलनाथ ने मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह को पत्र लिखकर कहा था कि जेएनएनयूआरएम में शिमला के लिए स्वीकृत इस प्रोजेक्ट में अभी तक शून्य परिणाम सामने आया है। अगर मार्च 2014 तक प्रोजेक्ट पूरा नहीं हुआ तो स्वीकृत राशि को नॉन स्टार्टर में डाल दिया जाएगा।
