
शिमला

हिमाचल में एक सप्ताह के भीतर परिवहन निगम को पांच करोड़ रुपये से अधिक का घाटा हुआ है। परिवहन मंत्री गोविंद ठाकुर ने कहा कि प्रदेश की जनता पर वित्तीय बोझ न पड़े, इसके चलते हिमाचल में बस किराये में बढ़ोतरी नहीं की गई है। सोमवार को परिवहन विभाग व निगम के अधिकारियों की समीक्षा बैठक हुई। इसकी अध्यक्षता परिवहन मंत्री गोविंद ठाकुर ने की। उन्होंने कहा कि लोगों को सुविधाएं प्रदान करने के उद्देश्य से कोविड-19 महामारी के दृष्टिगत उत्पन्न हुई इस विकट स्थिति में निगम के साथ-साथ निजी ऑपरेटर भी बेहतर कार्य कर रहे हैं।
बैठक में औद्योगिक क्षेत्रों में सीएनजी बसें चलाने के साथ-साथ दूर-दराज क्षेत्रों में पेट्रोल पंप स्थापित करने पर भी विचार-विमर्श किया गया। उन्होंने कहा कि हिमाचल में पर्यावरण के दृष्टिगत नई इलेक्ट्रिक बसों की खरीद की जाएगी। इस अवसर पर प्रधान सचिव परिवहन केके पंत, प्रबंध निदेशक यूनिस, निदेशक कैप्टन जेएम पठानिया सहित अन्य अधिकारियों भी उपस्थित थे।
स्पीति में लोगों ने नहीं उतरने दिए यात्री, बस समेत लौटाए
कोरोना काल के बीच प्रदेश में बसों का संचालन शुरू हो गया है, लेकिन लाहौल-स्पीति के लोग कोरोना के खौफ के चलते घाटी में बसों की आवाजाही नहीं चाहते हैं। घाटी के लोगों ने यात्रियों को लेकर पहुंची बस से लोगों को नहीं उतरने दिया और बस सहित वापस रिकांगपिओ भेज दिया। आरएम को पत्र लिखकर बसें न भेजने की मांग की है। वहीं, किन्नौर जिले की कई पंचायतों ने भी अड्डा प्रभारी को पत्र लिखकर बसें न भेजने की मांग की है। किन्नौर जिले में हिमाचल परिवहन निगम ने सरकार के आदेशानुसार 41 रूटों पर बस सेवाएं शुरू कर दी थीं।
आरसंग, लिप्पा, नाको, रारंग और हांगो सहित स्पीति वैली के लोगों ने आरएम रिकांगपिओ को पत्र लिख कर बसें न भेजने की मांग की है। उधर, परिवहन निगम के अड्डा प्रभारी सुजान नेगी ने बताया कि किन्नौर की कई पंचायतों ने पत्र दिया है कि उनकी पंचायतों में बसों को न भेजा जाए। इस करण निगम ने इन रूटों पर बसों को बंद कर दिया है। कहा कि स्पीति में लोगों ने बस में बैठी सवारियों को ही वापस भेज दिया है। काजा एसडीएम को इसकी सूचना दे दी है कि उक्त रूटों में बसें बंद कर दी हैं।
