
बिलासपुर। हिमाचल परिवहन निगम की बसें चंडीगढ़ में बिलासपुर की सवारियाें के लिए बेगानी साबित हो रही हैं। निगम की दूसरे जिलों के डिपो की बसों में बिलासपुर की सवारियों को सीट देने से आनाकानी की जाती है। इससे उन्हें परेशानी का सामना करना पड़ता है। घर पहुंचने के लिए उन्हें अकसर टैक्सियों के लिए जेब ढीली करनी पड़ती है। चंडीगढ़ से बिलासपुर आने वाले लोगों के साथ परिवहन निगम की बसों में एक तरह से सौतेला व्यवहार हो रहा है। हालांकि चंडीगढ़ से बिलासपुर की दूरी 135 किलोमीटर है। चंडीगढ़ से मंडी, कुल्लू व मनाली डिपो की बसों में उन्हें सीट देने से अकसर ना-नुकर की जाती है। इस मामले में वरीयता मनाली, कुल्लू व मंडी आदि की सवारियाें को मिलती है। बिलासपुर के लोगों की किस्मत तभी जाग पाती है, यदि कोई सीट बाकी बच जाए। इसके चलते लोगों को परेशान होना पड़ता है। दो-तीन दिन पहले बिलासपुर में एक व्यापारी आशीष की मृत्यु होने पर चंडीगढ़ में उनके रिश्तेदारों को भी ऐसी ही परेशानी से दो-चार होना पड़ा। मृतक के बहन-बहनोई मधु अवस्थी व विनीत अवस्थी के अनुसार चंडीगढ़ में बस अड्डे पर मनाली डिपो की दो बसों में उन्हें सीट देने से साफ इंकार कर दिया गया। रिश्तेदार की मृत्यु का हवाला देने पर भी चालक-परिचालक का दिल नहीं पसीजा। पुरजोर प्रयासों के बावजूद बात न बनने पर उन्हें टैक्सी का सहारा लेना पड़ा। व्यवस्था करने में हुई समय की बर्बादी के चलते वे काफी देरी से बिलासपुर पहुंचे, जिसकी वजह से वे अपने रिश्तेदार की अंतिम यात्रा में भाग नहीं ले सके। वरिष्ठ नागरिक सभा बिलासपुर के महासचिव आरएल शर्मा व व्यापार मंडल के वरिष्ठ उपाध्यक्ष महिपाल सांख्यान का कहना है कि चंडीगढ़ में जिले के लोगों को आए दिन इस तरह की समस्या का सामना करना पड़ता है। उन्होंने सरकार व परिवहन निगम से आग्रह किया है कि जनहित में इस समस्या के समाधान के लिए ठोस कदम उठाए जाएं। इस बारे में परिवहन निगम के क्षेत्रीय प्रबंधक संतोष कुमार ने कहा कि सभी डिपो की बसाें में एडवांस बुकिंग कराने का प्रावधान है। बिलासपुर डिपो की बसों के चालकों-परिचालकाें को सवारियों को प्राथमिकता के आधार पर सीट देने को कहा गया है।
