एक दिन नहीं, रोज मनाने की जरूरत पर्यावरण दिवस

अल्मोड़ा। उत्तराखंड लोक वाहिनी की पर्यावरण दिवस के उपलक्ष्य में हुई बैठक में वक्ताओं ने कहा कि पर्यावरण बचाने के लिए धरातल पर काम करना होगा। उन्होंने कहा कि पर्यावरण संरक्षण के लिए दिवस मनाने के बजाए सालभर निरंतर काम करने की जरूरत है।
केंद्रीय अध्यक्ष डा. शमशेर सिंह बिष्ट ने कहा कि उलोवा चिपको आंदोलन से जुड़ी रही है। उन्होंने कहा कि हर कार्यक्रम आयोजित करने को आज दिवस मनाने का फैशन सा हो गया है। साल में एक दिन निर्धारित दिवस पर कार्यक्रम कर इतिश्री कर ली जाती है और वर्षभर उदासीनता बरती जाती है। आज पर्यावरण दिवस एक दिन नहीं बल्कि प्रत्येक दिन मनाने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि जिन लोगों ने पर्यावरण को सबसे अधिक बिगाड़ा है वही लाखों रुपये खर्च कर इस दिवस को मनाते हैं। उत्तराखंड में 50 हजार एनजीओ में से जिले में 4166 एनजीओ हैं, जो कि पर्यावरण बचाने के नाम पर देश-विदेश से धन लेते हैं, परंतु पांच फीसदी भी जमीन में काम करने वाले नहीं हैं।
उन्होंने आरोप लगाया कि पर्यावरण संरक्षण के लिए करोड़ों रुपये का बजट प्राप्त करने वालों की सालभर पर्यावरण नष्ट करने वाले नेताओं और अधिकारियों के साथ सांठगांठ बनी रहती है। शहर में ही देवदार के पेड़ काटे गए, परंतु अधिकारी मौन बने रहे। जब तक राजनीति का पर्यावरण शुद्ध नहीं होता, तब तक प्राकृतिक पर्यावरण भी शुद्ध नहीं होगा। बैठक की अध्यक्षता पूर्व छात्रसंघ अध्यक्ष जगत रौतेला और संचालन पूरन चंद्र तेवाड़ी ने किया। बैठक में जंग बहादुर थापा, सुशीला धपोला, शमशेर बहादुर गुरुंग, कमलेश थापा, दयाकृष्ण कांडपाल, हरीश मेहता, अनीसउद्दीन, विशन दत्त जोशी, रेवती बिष्ट आदि उपस्थित थे।

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