
दुगड्डा। फतेहपुर के पास सिलगाड़ नदी के उफान में फंसने के बाद सुरक्षित निकाले गए बच्चों के प्रति प्रशासन और क्षेत्रीय जनप्रतिनिधि कितने गंभीर हैं, इसकी पोल अगले ही दिन खुल गई। अधिकारियों ने अब इस स्कूल को नदी के दूसरे छोर पर फतेहपुर के ही प्राथमिक विद्यालय के भवन में चलाने की अनुमति दे दी है। लेकिन व्यवस्था के नाम पर केवल एक कमरा उपलब्ध कराया गया है। इस एक कमरे में तीन कक्षाओं के 44 बच्चों को बैठाया जाना हैं। स्कूल का जरूरी सामान भी रखा जाएगा। मिड डे मील भी बनेगा और खिलाया भी जाएगा। जो व्यवहारिक तौर पर संभव दिख नहीं रहा है। शिक्षक, अधिकारियों के आदेशों का पालन तो कर रहे हैं लेकिन स्वीकार भी कर रहे हैं कि ऐसे में स्कूल का संचालन कैसे संभव है। सवाल उठता है कि क्या प्रशासन की केवल इतनी ही जिम्मेदारी थी।
फतेहपुर स्थित राजकीय कन्या पूर्व माध्यमिक विद्यालय के 30 बच्चे सिलगाड नदी पार करके स्कूल जाते समय मंगलवार को डूबने से बच गए थे। इस स्कूल में जाने का और कोई रास्ता न होने के कारण प्रशासन ने स्कूल को नदी के दूसरी ओर स्थित प्राथमिक विद्यालय में संचालित करने की अनुमति दी है। प्रशासन की इस व्यवस्था से बच्चों के अभिभावक भी संतुष्ट नहीं है । इसलिए बुधवार को कक्षा छह, सात और आठ के कुल 44 बच्चों में से केवल 26 ही स्कूल पहुंचे। एक ही कमरे में तीन कक्षाओं के इन बच्चों के बैठने की भी समुचित व्यवस्था नहीं थी। बच्चों के अभिभावक इस स्थिति में अपने बच्चों के भविष्य को लेकर चिंतित हैं। उन्होंने प्रशासन और जनप्रतिनिधियों पर बच्चों की उपेक्षा करने का आरोप लगाया है।
इस व्यवस्था में स्कूल संचालन संभव नहीं
– एक कमरे में तीन कक्षाओं के 44 बच्चों की व्यवस्था करना संभव नहीं है। कहां मध्याह्न भोजन बनेगा, कहां खिलाया जाएगा। आज आधे बच्चे ही स्कूल पहुंचे। सारे बच्चे आएंगे तो बैठने की व्यवस्था बनाने में भी दिक्कत होगी। वैसे बच्चों के राप्रावि फतेहपुर में बैठने का आदेश खंड शिक्षाधिकारी ने दिया है। -सुशीला उनियाल, प्रधानाध्यापिका कन्या जूनियर हाईस्कूल फतेहपुर
अब खुद ही बनाएंगे पुल
– नदी पर पुल की मरम्मत का कार्य हम खुद ही करेंगे। प्रशासन से तो कुछ करने की उम्मीद है ही नहीं। छात्रों को विद्यालय तक पहुंचाने की कुछ न कुछ व्यवस्था करनी ही होगी। -गजेंद्र चौधरी, ग्राम प्रधान फतेहपुर
नहीं तो अभिभावक करेंगे आंदोलन
-पुल के टूट जाने के बाद उसके निर्माण के लिये शासन-प्रशासन ने सुध नहीं ली। विद्यार्थियों की जिंदगी से खिलवाड़ किया जा रहा है। यह उचित नहीं है। सरकार पुल और विद्यालय की तत्काल व्यवस्था कराए।
– महावीर रावत, ग्रामीण
-पुल का निर्माण किया जाना आवश्यक है ताकि अन्य विद्यालयों के छात्र-छात्रायें भी विद्यालय जा सकें तथा ग्रामीणों को भी आवागमन में परेशानी न हो। निर्माण न होने पर आंदोलन किया जायेगा।
– वली मोहम्मद, ग्रामीण
-प्राथमिकता के आधार पर सिलगाड़ नदी के पुल को शीघ्र बनाने का प्रयास करना चाहिये ताकि नौनिहालों का जीवन सुरक्षित रहे। इस प्रकार की लापरवाही ठीक नहीं है। इससे ग्रामीण काफी आहत हैं।
-वीरेंद्र सिंह, ग्रामीण
