उफ! अव्यवस्था ने बढ़ाई दुश्वारियां

बिलासपुर। समय: 12 बजे। स्थान क्षेत्रीय अस्पताल बिलासपुर। दर्द में कराह रहा मरीज और इधर-उधर भटक रहे तीमारदार। ओपीडी में ताले लटके हुए हैं। क्षेत्रीय अस्पताल में यह कोई नई बात नहीं। अस्पताल प्रबंधन की अव्यवस्था ने मरीजों की दुश्वारियां बढ़ा दी है। मर्ज दूर करने के लिए आने वाले मरीजों का मर्ज यहां दूर होने की बजाए और बढ़ रहा है।
शुक्रवार को इंडियन बुलेटिन ने क्षेत्रीय अस्पताल का दौरा किया तो खामियां ही खामियां पाई गई। मेडिकल स्पेशलिस्ट के अलावा जनरल ओपीडी के कई केबिनों में ताले लटके दिखे। पुराने भवन की आधा दर्जन ओपीडी में से महज एक ही चिकित्सक तैनात थे। लोग मेडिकल स्पेशलिस्ट के आने का इंतजार करते रहे। एक बजे तक वह सीट पर नहीं बैठे। पता चला कि एक चिकित्सक के छुट्टी पर होने के कारण दो वार्डों के राउंड की जिम्मेदारी एक ही चिकित्सक के कंधे पर है। लगभग 12:30 बजे इंडियन बुलेटिन की टीम अल्ट्रासाउंड के कमरे के बाहर पहुंची तो वहां भी हाथ में पर्ची लेकर कई महिलाएं बाहर बैठी हुई दिखाई दी। सरकाघाट से आई महिला किरण ने बताया कि उसे अल्ट्रासाउंड के लिए आज की डेट मिली है। वह सुबह दस बजे यहां चिकित्सक के इंतजार में है। वहां मौजूद विभागीय कर्मी से पूछा तो पता चला कि अल्ट्रासाउंड विशेषज्ञ सीटी स्कैन कराने में व्यस्त है। वहां से फ्री होकर ही आ पाएंगी। निक्का राम ने बताया कि उनकी पत्नी को सांस की तकलीफ है। अल्ट्रासाउंड करवाने के लिए कहा गया है, लेकिन घंटों से वह चिकित्सक के आने का इंतजार कर रहे हैं। पौने एक बजे पुरानी ओपीडी का दौरा किया तो हालात वैसे ही थे। मरीज रत्न लाल भी वहां अपने इलाज को आए थे। झंडूता से रत्न लाल के साथ आए सदानंद ने बताया कि उन्होंने चिकित्सक से बात की तो उन्होंने लंच के बाद आने की बात कही है।
अस्पताल में तैनात 21 चिकित्सकों में से शुक्रवार को अधिकतर ओपीडी खाली दिखी। तीन चिकित्सकों की आपातकालीन ड्यूटी लगी जबकि एक का नाइट ऑफ। दो चिकित्सक ट्रेनिंग थे। चार चिकित्सक छुट्टी पर है तो दो कोर्ट एवीडेंस पर। एक चिकित्सक कैंप ड्यूटी पर रही।

कोड्स—
1. झंडूता से आए सूबेदार मेजर शरवन सिंह ने कहा कि वह पत्नी के इलाज को आए हैं। सुबह से वह चिकित्सक का इंतजार कर रहे हैं। ऐसी अव्यवस्था पहले कभी नहीं देखी।
2. बरठीं से आए सुनील कुमार ने बताया कि उनकी मां बीमार है। मेडिकल स्पेशलिस्ट से चैकअप करवाना है, लेकि न केबिन में ताला लटका है। सुबह दस बजे से वह इंतजार कर रहे हैं।
3. लंदरौर से आई लीला ने कहा कि उनके पति को सांस की तकलीफ है। वह सुबह सात बजे यहां पहुंचे है, लेकिन कोई चैकअप करने वाला नहीं आ रहा।
4. बक्शी राम ने कहा कि वह वह टाइफाइड से ग्रस्त है। अस्पताल की यह अव्यवस्था सहन नहीं होती। सुबह से वह इंतजार कर रहे हैं। चैकअप के लिए ओपीडी में चिकित्सक नहीं है।

कोड्स–
अस्पताल में 21 चिकित्सक तैनात है। चार आपात कालीन सेवा के लिए रहते हैं। एक मेडिकल स्पेशलिस्ट कोर्ट एवीडेंस पर है। ऐसे में एक ही चिकित्सक को दो-दो वार्ड के मरीजों का चैकअप करना पड़ा है। इसमें समय तो लगेगा ही। रेडियोलॉजिस्ट भी एक ही हैं। कुछ छुट्टी पर हैं। वैसे जनरल ओपीडी में चिकित्सक तैनात हैं। -डा. एमएल कौशल, सीएमओ बिलासपुर।

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