उत्पादकों को बांटे सडे़ आलू

उत्तरकाशी। सरकारी राहत के नाम पर स्थानीय लोगों को मैदानी मंडियों में सड़े आलू, चावल, आटा भेजा जा रहा है। इधर, मैदानी क्षेत्र में धूम मचाने वाला भटवाड़ी का आलू हाइवे बंद होने के कारण खेतों में ही सड़ने लगा है। स्थानीय लोग इसे राहत के नाम पर आपदा पीड़ितों का मजाक उड़ाना बता रहे हैं। सड़े आलू वाले राहत के थैलों से भी अभी भटवाड़ी के 2572 परिवार वंचित हैं। जिसमें सेना के हर्षिल हेलीपेड वाले बगोरी गांव के 419 परिवार शामिल हैं।
गांव, घर तथा स्थानीय बाजार में नमक, तेल, माचिस, चीनी, चायपत्ती, साबुन न मिलने पर टकनौर क्षेत्रवासी सौ किमी पैदल चलकर पीठ पर सामान लादकर गांव लौट रहे हैं। क्यार्क गांव के भरत सिंह, धर्म सिंह, राजेंद्री देवी, भटवाड़ी के राघवानंद नौटियाल तथा कुज्जन के प्रधान रघुवीर सिंह ने बताया कि राहत के नाम पर सरकार उनका मजाक उड़ा रही है। स्थानीय आलू खेतों में सड़ रहे हैं, और राहत के नाम पर मैदानी मंडियों से लाकर सड़े आलू थमाए जा रहे हैं।

सप्ताह भर बाद भी नहीं पहुंची राहत

उत्तरकाशी। आपदा आए 29 दिन बीतने के बाद भी तहसील मुख्यालय के सभी परिवारों तक राहत नहीं पहुंच पाई है। आगे बगोरी, जखोल, जौंकाणी, द्वारी, बार्सू, पाला, तिहार, रैथल, भंगेली, सिल्ला, मल्ला, लाटा, गोरसाली गांव भी अभी 10 किलो राहत के थैलों से वंचित हैं।

भटवाड़ी के 62 गांवों के 8998 परिवारों में से 2572 परिवारों तक राहत नहीं पहुंच पाई है। गांवों में सस्ता गल्ला विक्रेता की दुकानों तक राशन पहुंचाने के प्रयास जारी हैं।

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