उत्तराखंड मानव तस्करी का दूसरा बड़ा सोर्स

उत्तराखंड में हल्द्वानी और देहरादून मावन तस्करी के प्रमुख अड्डे हैं। पश्चिम बंगाल के बाद उत्तराखंड मानव तस्करी का दूसरा सबसे बड़ा सोर्स है। यहां से पहाड़ की बेटियों को दूसरे राज्यों और देशों में बेचा जा रहा है।

हल्द्वानी में रविवार को एंटी ह्यूमन ट्रैफिकिंग सेल हल्द्वानी और नैनीताल पुलिस की ओर से आयोजित कार्यशाला में यह बात सामने आई।

इम्पावर पीपुल के सीईओ ज्ञानेंद्र कुमार ने बताया कि उत्तराखंड से 700-800 लड़कियों को हर साल शादी के नाम पर बेचा जा रहा है। आंकड़ों के अनुसार करीब 400 लोगों को अन्य कारणों से हर साल यहां से बेचा जाता है। उन्होंने बताया कि करोड़ों रुपयों का मानव तस्करी का कारोबार यहां हो रहा है।

कुमाऊं और नेपाल से लोगों को हल्द्वानी लाया जाता है। यहां से उन्हें दिल्ली या अन्य राज्यों में बेच दिया जाता है। इसी प्रकार गढ़वाल से बेटियों को लाकर पहले देहरादून में ठहराया जाता है और वहां से उन्हें बेच दिया जाता है।

क्या है सोर्स, ट्रांजिट और डेस्टिनेशन
मानव तस्करी तीन चरणों में होती है। तस्कर कभी भी किसी को लाकर सीधे दूसरे को नहीं बेचते। सबसे पहले उसे उसके घर या गांव (सोर्स) से लाकर किसी अन्य जगह या अड्डे (ट्रांजिट) में रखा जाता है। वहां से उसका सौदा किया जाता है और फिर उसे खरीदार के पास (डेस्टिनेशन) पहुंचाया जाता है।

सोशल साइट्स बनी जरिया
अब ट्रैफिकिंग के लिए भी इस नेटवर्क से जुड़े लोग सोशल साइट्स को जरिया बना रहे हैं। सोशल साइट्स पर पीड़ित से संपर्क किया जाता है। उसे नौकरी, शादी, मॉडलिंग या अन्य तरह का झांसा देकर बुलाया जाता है, जहां से उसका सौदा कर दिया जाता है। ऐसे में इस ट्रैफिकिंग चेन को पकड़ पाना अब बेहद मुश्किल हो गया है।

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