उत्तराखंड पुलिस का कमाल, सीमित संसाधनों में बड़ा काम

उत्तराखंड में मची तबाही के दौरान और बाद में राज्य पुलिस ने सीमित संसाधनों के बावजूद खुद को साबित करने में कोई कसर नहीं छोड़ी। खतरनाक जल प्रलय का आभास होते ही गौरीकुंड से ढाई से तीन हजार लोगों को निकालकर सुरक्षित स्थानों पर भेजने का काम कोई आसान नहीं था।

उसी रात रुद्रप्रयाग पुलिस ने रेडियोग्राम से सभी जिलों को संदेश भेजकर यात्रियों को रोकने का काम किया। और अब पुलिस और एनडीआरएफ की टीम केदारनाथ में हर रोज शवों को मलबे से निकालकर अंतिम संस्कार करने में जुटी हैं।

यह सच किसी से छुपा नहीं है कि यदि 16 जून को अभियान चलाकर गौरीकुंड से लोगों को न निकाला जाता, तो लापता लोगों का आंकड़ा कम से कम तीन हजार और ऊपर जाता।

गौरीकुंड पुलिस चौकी इंचार्ज सब-इंस्पेक्टर हेमेंद्र सिंह रावत ने अपने 25 साथियों के साथ गौरीकुंड को खाली कराने के लिए युद्धस्तर पर काम किया। यहां से सभी लोग गौरीगांव की तरफ भेजे गए।

डॉक्टर से लेकर स्वीपर तक का ‌काम किया
इसी रात रुद्रप्रयाग के एसपी बरिंदरजीत सिंह ने रात में ही रेडियोग्राम के माध्यम से सभी जिलों को अलर्ट कर यात्रियों को आगे बढऩे से रोकने के निर्देश दिया।

कई और स्थानों पर भी यात्री रोके गए। एसपी रुद्रप्रयाग बरिंदरजीत सिंह ने गुलदार, कमांडो, पर्वतारोही पुलिस और वायरलैस का संयुक्त दल बनाकर आपदा क्षेत्रों में उतारा। पुलिस ने डॉक्टर से लेकर स्वीपर तक का काम किया। शवों के पंचनामे से लेकर अंतिम संस्कार तक सारा काम पुलिस के जिम्मे रहा।

एसपी रुद्रप्रयाग बरिंदरजीत सिंह ने बताया कि लोगों के पास कपड़े नहीं थे, तो पुलिसवालों ने अपनी वर्दी तक दे दी। आपदा के दौरान अपने सीमित संसाधनों के साथ पुलिस ने यात्रियों को रात में ठहरने के लिए चौकियों के दरवाजे खोल दिए।

फिलहाल, जमीन में आधे फंसे शवों को निकालकर उनका दाह संस्कार किया जा रहा है। केदारनाथ मंदिर के आस-पास मलबे में फंसे शवों को निकालना असाधारण काम है।

यह काम गौरीकुंड, रामबाड़ा से लेकर केदारनाथ तक पिछले एक महीने से चल रहा है। और, अभी तक 404 शवों को मुखाग्नि दी जा चुकी है। इस बात की दाद देनी होगी कि डीआईजी गणेश सिंह मार्तोलिया पिछले एक महीने से लगातार अपनी टीम के साथ डटे है और डीआईजी गढ़वाल अमित सिन्हा भी वहीं कैंप कर रहे हैं।

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