उत्तराखंड के जांबाज के आगे नतमस्तक देश

चौखुटिया। दिल्ली पुलिस के इंस्पेक्टर मोहन चंद्र शर्मा 2008 में आज ही के दिन बाटला हाउस कांड में आतंकवादियों की गोली से शहीद हो गए थे। वीरता और राष्ट्रपति पदक प्राप्त श्री शर्मा ने कई आतंकवादी मार गिराए थे। उनकी याद में पैतृक गांव तिमिलखाल में 19 सितंबर को शहीद दिवस मनाया जाएगा।
13 सितंबर 2008 को दिल्ली में हुए सीरियल ब्लास्ट के छह दिन बाद 19 सितंबर को जामिया नगर के बाटला हाउस में हुए एनकाउंटर में दो आतंकी मारे गए थे। जबकि दो फरार हो गए थे। इसी दौरान आतंकवादियों की गोली से चौखुटिया तहसील अंतर्गत ग्राम पंचायत आदिग्राम कनौणियां के तिमिलखाल निवासी पुलिस इंस्पेक्टर मोहन चंद्र शर्मा (मासीवाल) शहीद हो गए थे।
राजनीतिक रूप से बहुचर्चित रहे इस एनकाउंटर मामले में गत 25 जुलाई को दिल्ली की साकेत कोर्ट ने अपना फैसला सुनाया। जिसमें मुठभेड़ को सही ठहराते हुए आतंकी शहजाद को श्री शर्मा की हत्या का दोषी मानते हुए सजा सुनाई गई थी। श्री शर्मा को राष्ट्रपति पुरस्कार के साथ ही मरणोपरांत अशोक चक्र से सम्मानित किया गया। उनकी वीरता को देखते हुए सात बार वीरता पुरस्कार से नवाजा गया। 24 सितंबर 1965 में जन्मे श्री शर्मा की याद में उनके पैतृक गांव तिमिलखाल में शहीद स्मारक भी बनाया गया है। जिसमें प्रतिवर्ष श्रद्धांजलि कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं।

कई महत्वपूर्ण मामलों में रही भूमिका
चौखुटिया। अपने कार्यकाल में 35 आतंकियों को मार गिराने और सात दर्जन से भी अधिक आतंकियों को गिरफ्तार कराने में अहम भूमिका निभाने वाले मोहन शर्मा 26 जून 1989 में दिल्ली पुलिस में बतौर सब इंस्पेक्टर भर्ती हुए थे। उन्होंने जिन महत्वपूर्ण मामलों में कामयाबी हासिल की उनमें 2000 में हुए लालकिला गोलीकांड, 2001 में हुए संसद पर हमला, 2005 में दिल्ली में हुए सीरियल बम धमाके कांड शामिल थे। 2006 में श्री शर्मा की टीम ने निजामुद्दीन इलाके में लश्कर के दो आतंकियों को गिरफ्तार किया था। आतंकवादियों के खिलाफ खासा सक्रिय रहने के कारण ही वह आईबी के सीधे संपर्क में रहते थे।

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