
कुदरत के कहर की सबसे ज्यादा मार झेलने वाले उत्तराखंड के केदारनाथ में महामारी फैलने के डर के बीच शवों का सामूहिक दाह संस्कार शुरू हो चुका है। प्रशासन अंतिम संस्कार करने से पहले शवों की तस्वीरें और डीएनए सैंपल ले रहा है।
इस बीच राज्य के मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा ने कहा कि अब प्रशासन का फोकस स्थानीय लोगों को राहत सामग्री मुहैया कराने पर है।
उन्होंने कहा, ‘अब हमारी योजना गांवों में कम से कम दो महीने के लिए पर्याप्त भोजन सामग्री मुहैया कराने की है। हमें स्थानीय लोगों की चिंता है।’
मुख्यमंत्री ने कहा, ‘अलग-अलग जगह फंसे ज्यादातर भक्त और पर्यटक अब यहां से जा चुके हैं और शेष बचे लोगों को निकालकर जल्द से जल्द उनके श्ाहर भेज दिया जाएगा।’
जीवित बचे लोगों तक राहत सामग्री पहुंचाना काफी बड़ी चुनौती है। अब भी कई गांवों से संपर्क नहीं हो सका है और उन्हें बीते आठ दिन से कोई मदद नहीं मिली है।
इस बात का डर है कि मरने वालों की तादाद काफी बढ़ सकती है। अब भी उत्तराखंड में 5,000 से ज्यादा लोग फंसे हैं और आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक कम से कम 400 लोग लापता हैं।
गुरुवार सवेरे बदरीनाथ से 15 यात्रियों का पहला जत्था जोशीमठ एयरबेस पहुंचा। मौसम साफ होने के बाद सुबह हर्षिल में भी राहत और बचाव कार्यक्रम बहाल कर दिया गया।
जोशीमठ में हेड ऑफ ऑपरेशंस ब्रिगेडियर अक्षत अरोड़ा ने कहा, ‘छह एमआई-17 और छोटे हेलीकॉप्टर काम पर लगे हैं। इसके अलावा चीता और निजी हेलीकॉप्टर भी हैं।’
सरकारी अधिकारियों का कहना है कि राहत और बचाव का काम पूरा करने में 48 से 72 घंटे तक लग सकते हैं। मौसम विभाग का कहना है कि शुक्रवार से मौसम थोड़ा साफ हो सकता है, जबकि गुरुवार को हल्की बारिश हो सकती है।
