उच्चतम न्यायालय ने भुल्लर की पुनर्विचार याचिका खारिज की

उच्चतम न्यायालय ने भुल्लर की पुनर्विचार याचिका खारिज की

नई दिल्ली: उच्चतम न्यायालय ने आज खलिस्तान लिबरेशन फोर्स (केएलएफ) के आतंकवादी देविंदरपाल सिंह भुल्लर की वह अर्जी खारिज कर दी जिसमें उसकी मौत की सजा को उम्रकैद में तब्दील करने से इंकार के शीर्ष न्यायालय के फैसले पर फिर से विचार करने की मांग की गयी थी। भुल्लर ने इस आधार पर अपनी मौत की सजा को उम्रकैद में तब्दील करने की मांग की थी कि उसकी दया याचिका पर सरकार ने फैसला करने में काफी लंबा समय लगाया है।

न्यायमूर्ति जी एस सिंघवी की अध्यक्षता वाली पीठ ने अपने 12 अप्रैल के आदेश पर फिर से विचार करने से इंकार कर दिया। 12 अप्रैल के फैसले में शीर्ष अदालत ने उसकी मौत की सजा को उम्रकैद में तब्दील करने से इंकार कर दिया था।

भुल्लर को सितंबर 1993 में दिल्ली में एक बम धमाके को अंजाम देने के आरोप में दोषी करार देकर मौत की सजा सुनायी गयी थी। धमाके में नौ लोग मारे गए थे जबकि 25 जख्मी हो गए थे। जख्मी हुए लोगों में युवा कांग्रेस के तत्कालीन अध्यक्ष एम एस बिट्टा भी शामिल थे। भुल्लर ने 14 जनवरी 2003 को राष्ट्रपति के समक्ष दया याचिका दायर की थी। करीब आठ साल बाद 25 मई 2011 को राष्ट्रपति ने उसकी दया याचिका खारिज कर दी।

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