
पालमपुर (कांगड़ा)। शरद नवरात्रों में जहां शक्तिपीठों में भक्तों का सैलाब उमड़ रहा है। वहीं पालमपुर के समीप डरोह कस्बे में स्थित सिमसा माता के मंदिर में भी नि:संतान दंपति संतान प्राप्ति के लिए माथा टेकने आ रहे हैं। प्रदेश का यह एकमात्र ऐसा मंदिर है, जहां माता मात्र फूल और जोत से प्रसन्न होती है। मंदिर में पैसा चढ़ाने पर मनाही है।
मान्यता है कि सिमसा माता ने झुग्गी-झोपड़ी में रहने वाली कन्या का रूप धारण करके एक दिन सुबह डरोह कस्बा के रविंद्र कोरला के घर पर पहुंचकर मीठा देने की फरियाद की थी। रविंद्र कोरला के अनुसार सर्दी के दिन थे और उन्होंने एक कटोरी में चीनी कन्या को दी। कन्या ने रविंद्र कोरला को वचन दिया कि जो भी नि:संतान दंपति यहां आकर संतान के लिए फरियाद करेगा, उसकी सूनी गोद अवश्य भरेगी। दरबार पर आए भक्त मंदिर में तिल के तेल की जोत और फूल चढ़ाकर मां से मन्नत मांगते हैं। यहां मां के अंगुलियाें के निशान आज भी देखे जा सकते हैं। रविंद्र कोरला का दावा है कि सिमसा माता के चमत्कार एवं आशीर्वाद से असंख्य दंपतियों के आंगन में वर्षों के बाद किलकारी सुनने को मिली है। उन्होंने कहा कि नवरात्र पर्व के अवसर पर माता सिमसा भक्तों की मनोकामना पूरी करती है। नि:संतान दंपति मंदिर में आकर संतान के लिए मन्नत मांग रहे हैं।
