
रोहडू। प्रदेश के बागवानों को इस सेब सीजन में तगड़ा झटका लग सकता है। प्रदेश के आढ़तियों ने इस वर्ष सेब की पेटियों को दर में बेचने का निर्णय लिया है। अभी तक मंडियों में गढ़ के हिसाब से सेब बेचा जाता था। दर में सेब बिक्री होने से बागवानों को भारी नुकसान उठाना पड़ेगा। प्रदेश आढ़ती एसोसिएशन ने यह निर्णय सोलन में बैठक कर लिया है।
प्रदेश में पिछले सेब सीजन तक सेब गढ़ में बेचा जाता था। गढ़ में सेब बेचने से बागवानों को बड़े आकार के सेब से लेकर छोटे आकार तक के सेब का एक ही दाम मिलता था। अब आढ़ती सेब की पेटियों को दर के हिसाब से बेचेंगे। बड़े आकार के सेब से लेकर एक्सट्रा स्माल आकार की पेटी एक ही रेट से बिकेगी। छोटे आकार के सेब की पेटी में दर लगाकर उसका रेट 20 प्रतिशत कम किया जाएगा। इससे बागवानों को सीधे तौर पर प्रति पेटी 20 प्रतिशत का नुकसान उठाना पड़ेगा। अधिकांश बगीचों में छोटे आकार का सेब ही अधिक निकलता है। ऐसे में बागवानों को इस सेब सीजन में आर्थिक नुकसान उठाना पड़ सकता है। प्रदेश आढ़ती एसोसिएशन के संयुक्त सचिव विक्की काल्टा ने माना कि सोलन में बैठक आयोजित कर सेब की पेटियों को दर में बेचने का निर्णय लिया गया है। उन्होंने बताया कि इस वर्ष प्रदेश की सभी मंडियों में आढ़ती दर के हिसाब से सेब बेचेंगे। छोटे आकार के सेब के दाम दर लगाकर अन्य आकार के सेब के दाम से 20 प्रतिशत कम किए जाएंगे।
क्या कहना है बागवानी मंत्री का
बागवानी मंत्री विद्या स्टोक्स ने बताया कि सरकार ने अभी इस तरह का कोई भी निर्णय नहीं लिया है। अभी तक मंडियों में सेब गढ़ के हिसाब से बेचा जाता था। इससे बागवानों को लाभ मिलता था। दर के हिसाब से सेब बेचने का निर्णय मान्य नहीं होगा। सरकार उचित कार्यवाही अमल में लाएगी।
फैसला बागवानी विरोधी
फल एवं सब्जी उत्पादक संघ के प्रदेश महासचिव हरीश चौहान ने बताया कि सेब की पेटियों को दर में बेचने का फैसला बागवानी विरोधी है। प्रदेश सरकार को इस मामले में सख्त कदम उठाने चाहिए।
वहीं, किसान सभा के क्षेत्रीय संयोजक सुखदेव चौहान ने बताया कि दर में सेब बेचने का निर्णय गलत है। इससे बागवानों को नुकसान होगा।
