
शिमला। कहीं हमारे दुलार और लापरवाही की वजह से तो नौनिहालों की नजर कमजोर नहीं हो रही? यह सवाल इसलिए क्योंकि अधिकांश घरों में बच्चों का घंटों टीवी देखना, वीडियो गेम्स खेलना, कंप्यूटर और जंक फूड का इस्तेमाल आम बात है। जरा गौर कीजिए। मुख्यमंत्री विद्यार्थी स्वास्थ्य कार्यक्रम के तहत शिमला जिला में एक साल में कुल 77,868 छात्रों की आंखें जांची गई हैं। इनमें से 6,384 छात्रों की नजर कमजोर पाई गई। यानी आठ फीसदी बच्चों में नजर दोष। यह आंकड़े महज सरकारी स्कूलों के हैं। अगर निजी स्कूलों को भी इसमें शामिल किया जाए तो अंदाजा लगा लीजिए कि आंकड़े हमें क्या आईना दिखाएंगे।
विशेषज्ञ ज्यादा टीवी देखना, नजदीक या लेटकर टीवी देखना, संतुलित आहार न लेना और जंक फूड का अधिक इस्तेमाल को नजर कमजोर होने का कारण मानते है। बच्चों की आंखें चेक करवाने में लापरवाही भी एक कारण हो सकता है। अभिभावक बच्चों की सुविधा के लिए कंप्यूटर, लैपटॉप, इंटरनेट भले ही मुहैया करवा रहे हैं पर ज्यादा देर तक इनका इस्तेमाल नौनिहालों के लिए ठीक नहीं।
ये हैं बड़ी वजहें
एक घंटे से अधिक टीवी देखना, वीडियो गेम, लेपटॉप, या कंप्यूटर पर ज्यादा काम करना
संतुलित आहार की कमी, जंक फूड का अधिक इस्तेमाल
बहुत नजदीक से टीवी देखना या लेटकर टीवी देखना
गलत मुद्रा में बैठकर टीवी देखने से भी आंखों पर दबाव
समय पर आंखों का चेकअप न करवाना
(नेत्र रोग विशेषज्ञ डा. एसएस नेगी के अनुसार)
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ऐसा करें अभिभावक
रोजाना एक घंटे से अधिक बच्चे को टीवी न देखने दें
बच्चे के आहार में हरी सब्जियां, गाजर, मूली शामिल करें
बच्चे को कम से कम पांच मीटर दूर से टीवी देखने दें
टीवी देखते समय बच्चे को लेटने न दें
तीन साल के बच्चे की आंखें चेक कराएं
चश्मा लगा है तो हर छह माह में जांच करवाएं
