इमरजेंसी में नहीं दाखिल करने को जगह

बरोट (मंडी)। चौहारघाटी और छोटा भंगाल क्षेत्र की 20 पंचायतों की करीब पचास हजार आबादी को स्वास्थ्य सुविधा मुहैया करवाने वाला प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र बरोट पिछले एक साल से मात्र दो कमरों में चल रहा है। पर्याप्त स्टाफ और सुविधाएं होने के बावजूद इलाज करवाने के लिए आने वाले लोगों को परेशानी झेलनी पड़ रही है। पिछले साल सितंबर माह में ऊहल नदी में बाढ़ आने के कारण पीएचसी बरोट के सभी कमरों में मलबा भर गया था। जिससे वैकल्पिक व्यवस्था के लिए स्वास्थ्य केंद्र को पंजाब राज्य बिजली बोर्ड के दो कमरों में शिफ्ट किया गया। स्वास्थ्य केंद्र के लिए पर्याप्त जगह न होने से मरीजों और डाक्टरों को परेशानी झेलनी पड़ रही है। दो कमरों में डाक्टर और अन्य स्टाफ के बैठने, ओपीडी, डिस्पेंसरी, लेबर रूम चल रहा है। आपातकालीन सेवा में बीमार व्यक्ति को दाखिल करने की सुविधा तक नहीं है। एक साल के बाद भी पीएचसी का पुराना भवन तैयार नहीं हो पाया है।
स्थानीय निवासी सीता राम, राम चंद, कृष्ण, ज्ञान चंद, मेहर चंद, संत राम, गोबिंद, श्रीराम, जीवानंद, धर्म सिंह, प्रभु राम, महंत आदि का कहना है कि पिछले साल नदी में आई बाढ़ से पीएचसी भवन में भारी मलबा घुस गया था। तब से पीएचसी मात्र दो कमरों में चल रहा है। पर्याप्त जगह न होने से मरीजों को दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। स्वास्थ्य मंत्री कौल सिंह ठाकुर ने स्वास्थ्य केंद्र को पुराने भवन में शिफ्ट के लिए 10 लाख रुपये स्वीकृत किए थे। साथ ही विभागीय अधिकारियों को शीघ्र पुराने भवन से मलबा हटाने के आदेश दिए थे। दो माह से चारदीवारी, मलबा हटाने, शौचालय निर्माण और भवन का मरम्मत कार्य चला हुआ है लेकिन, काम पूरा नहीं हुआ है।
स्वास्थ्य केंद्र के चिकित्सा अधिकारी डा. विजय और डा. विनय का कहना है कि पुराने भवन में कुछ काम रह गया है। जैसे ही काम पूरा होगा, पीएचसी को शिफ्ट किया जाएगा। फिलहाल दो कमरों में ही सब कुछ करना पड़ रहा है।
बरोट पंचायत प्रधान चमेल सिंह का कहना है कि 10 लाख की राशि से भवन मरम्मत, चारदीवारी, शौचालय का निर्माण, बिजली कार्य और पेंटिंग का काम पूर्ण हो चुका है। पानी की निकासी के लिए ड्रेन और परिसर को पक्का करने के लिए राशि नहीं आई है। जिन कार्यों के लिए धनराशि मिली है, उसे एक सप्ताह के भीतर पूरा किया जाएगा।

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