इन दरारों वाले घरों में रहने से डर लगता है’

उत्तरकाशी। आपदा की दृष्टि से अतिसंवेदनशील उत्तरकाशी जिले के सैकड़ों गांव वर्षों से खतरे की जद में हैं। किसी गांव के ऊपर से पहाड़ दरक रहे हैं, तो किसी के नीचे गाड़-गदेरे एवं नदियां कटाव कर रहे हैं। लेकिन सरकार, शासन-प्रशासन इन गांवों के विस्थापन पर गंभीर हैं। अभी तक कई गांवों का भू-गर्भीय सर्वेक्षण तक नहीं हो पाया, जिनका सर्वेक्षण हुआ भी है उनके विस्थापन की रिपोर्ट शासन की फाइलों में कैद होकर रह गई।
जिले में भूस्खलन व भू-धंसाव से प्रभावित गांवों की संख्या हर साल बढ़ती जा रही है। सरकारी आंकड़ाें पर यदि नजर दौड़ाएं तो पिछले साल तक ऐसे गांवों की संख्या 103 थी। इस बार की आपदा में पिडकी, मधेष, दुरबिल व नूराणू गांव भी शामिल हो गए हैं। अब प्रभावित गांवों की संख्या 106 तक पहुंच गई है। इसमें अधिकतर ऐसे गांव हैं जिन पर चारों ओर से संकट के बादल मंडरा रहे हैं। हल्की सी बारिश से इन गांवों में भूस्खलन, भू-धंसाव शुरू हो जाता है और ग्रामीण गांव छोड़कर सुरक्षित स्थानों पर चले जाते हैं। लेकिन सरकारी तंत्र गांवों में सुरक्षात्मक कार्य करने तथा विस्थापन पर गंभीर नहीं दिखाई दे रहा है। वर्ष 2002 से लेकर अभी तक मात्र 75 गांवों का ही भू-वैज्ञानिकों से सर्वे करवाया गया, जिसमें वैज्ञानिकों ने 12 गांवों के विस्थापन की जरूरत बताई थी, जबकि शेष गांवों में सुरक्षात्मक कार्य करने रिपोर्ट दी। प्रशासन ने वर्ष 2010 में विस्थापन की रिपोर्ट तो शासन को भेज दी, लेकिन रिपोर्ट शासन की फाइलों में धूल फांक रही है। विस्थापन पर अभी तक कार्रवाई शुरू नहीं हो पाई। ग्रामीण आज भी भय के साये में जीवनयापन करने के लिए मजबूर हैं।

रिपोर्ट से आगे नहीं बढ़ी कार्रवाई
उत्तरकाशी। जिला प्रशासन द्वारा वर्ष 2010 में भटवाड़ी के पिलंग, जौडाव, सिल्याण, सिरोर, भटवाड़ी, स्याबा, डिडसारी, बड़कोट के बाडिया, पुरोला के गौल, पौंटी, छानिका गांव के विस्थापन के लिए शासन को रिपोर्ट भेजी गई। लेकिन शासन ने गांवों के विस्थापन पर कार्रवाई नहीं की।

तहसीलवार प्रभावित गांवों की संख्या
भटवाड़ी 33
डुंडा 21
चिन्यालसौड़ 29
बड़कोट 15
पुरोला 03
मोरी 05

कोट
जिले में 106 गांव भूस्खलन एवं भू-धंसाव से प्रभावित हैं। इनमें 75 गांवों का भू-गर्भीय सर्वेक्षण किया गया था, जिसमें 12 गांवों के विस्थापन की रिपोर्ट पूर्व में शासन भेज दी गई थी। जबकि शेष गांवों का सर्वेक्षण चल रहा है। – देवेंद्र पटवाल, जिला आपदा प्रबंधन अधिकारी

कोट
जिन गांवों के विस्थापन की रिपोर्ट भेजी गई है उनको अन्यत्र बसाने की प्रक्रिया शुरू हो गई है। भूमि का चयन कर ग्रामीणों के लिए प्री-फेब्रीकेटेड घर बनाए जाएंगे। जबकि शेष गांवों का भू-गर्भीय सर्वेक्षण करवाया जा रहा है। – विजयपाल सजवाण, संसदीय सचिव

Related posts