इंजीनियरिंग कालेज में अनियमितता का मामला फिर गर्माया

द्वाराहाट। विपिन चंद्र त्रिपाठी कुमाऊं प्रोद्यौगिकी संस्थान में अनियमितताओं का जिन्न एक बार फिर बोतल से बाहर आने लगा है। पूर्व कनिष्ठ उप प्रमुख और राज्य आंदोलनकारी चंदन नेगी ने इस मामले में दोषियों के खिलाफ कार्रवाई नहीं होने पर आमरण अनशन करने की चेतावनी दी है।
उन्होंने कहा है कि जनांदोलन के बाद आईएएस डा. राघव लंगर के नेतृत्व में दो सदस्यीय टीम ने प्रोद्यौगिकी संस्थान में अनियमितताओं की जांच की थी। जिसमें करोड़ों का गोलमाल पकड़ में आया था। उनकी स्पष्ट संस्तुति के बावजूद लंबे समय बाद भी इस मामले में कार्रवाई नहीं की गई है। उन्होंने कहा है कि अल्टेयर नामक कंप्यूटर साफ्टवेयर बाजार में 40 लाख रुपये में उपलब्ध था जबकि संस्थान में उसकी खरीद 98 लाख में दिखाई गई थी। उन्होंने कहा कि जांच रिपोर्ट में प्राचार्य सहित चार प्रोफेसरों को तत्काल प्रभाव से निलंबित करने और कठोर दंडात्मक कार्रवाई की संस्तुति की गई गई थी परंतु रिपोर्ट ठंडे बस्ते में डाल दी गई है। उन्होंने दोषियों के खिलाफ कार्रवाई नहीं होने पर संस्थान के प्रशासनिक भवन में आमरण अनशन शुरू करने की चेतावनी दी है।
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जांच के नाम पर लीपापोती, कार्रवाई महज खानापूर्ति
द्वाराहाट। शासन ने प्रोद्यौगिकी संस्थान के मामले में आईएएस डा. राघव लंगर की रिपोर्ट पर तो कोई अमल नहीं किया अब दूसरी जांच रिपोर्ट में कुछ करने के बजाए महज प्रतिकूल प्रविष्टि की संस्तुति कर लीपापोती की जा रही है।
रानीखेत के तत्कालीन संयुक्त मजिस्ट्रेट आईएएस डा. राघव लंगर की रिपोर्ट पहले ही ठंडे बस्ते में डाल दी गई थी। इस बीच कुलपति तकनीकी शिक्षा की अध्यक्षता में गठित जांच समिति ने फिर से जांच की। रिपोर्ट के आधार पर अपर मुख्य सचिव राकेश शर्मा ने पांच सितंबर को कुमाऊं प्रोद्यौगिकी संस्थान के निदेशक डा. डीएस पुंडीर को भेजे पत्र में कठोर चेतावनी देने के साथ ही अनियमितताओं के लिए जिम्मेदार चार प्रवक्ताओं के खिलाफ प्रतिकूल प्रविष्टि की संस्तुति की है। इतने बडे़ मामले में महज प्रतिकूल प्रविष्टि की संस्तुति से स्पष्ट हो गया है कि उच्च अधिकारियों द्वारा दोषियों को बचाने के लिए हर हथकंडा अपनाया जा रहा है।
इधर अपर सचिव के पत्र को जारी हुए दो माह का समय बीत गया है पर इस पर भी अमल नहीं हुआ है। इस बारे में कुमाऊं प्रोद्यौगिकी संस्थान के निदेशक डा. डीएस पुंडीर ने कहा कि वह स्वयं प्रतिकूल प्रविष्टि नहीं कर सकते हैं। इस मामले में बीओजी की बैठक में प्रस्ताव लाने के बाद प्रक्रिया के तहत ही कोई कार्रवाई की जा सकती है।

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