आसाराम ‘गुरुदक्षिणा’ मामला: दिग्गी ने दी सफाई, किसे पता था कि आसाराम ऐसे निकलेंगे

आसाराम ‘गुरुदक्षिणा’ मामला: दिग्गी ने दी सफाई, किसे पता था कि आसाराम ऐसे निकलेंगे

इंदौर: वर्ष 2014 के आम चुनावों में भाजपा की ओर से प्रधानमंत्री पद के संभावित उम्मीदवार और गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी के सियासी किरदार पर तीखे सवाल उठाते हुए कांग्रेस महासचिव दिग्विजय सिंह ने कहा कि देश मोदी को कभी कबूल नहीं करेगा। आसाराम मामले पर दिग्गी ने सफाई देते हुए कहा कि उस वक्त किसे पता था कि आसाराम इस चरित्र के होंगे और इस तरह का काम करेंगे।

दिग्विजय ने कल रात यहां कर्मचारी भविष्य निधि कर्मचारी संघ के कार्यक्रम मेें कहा, ‘जिस व्यक्ति ने निजी महत्वाकांक्षा के कारण अपने ही गठबंधन को तोड़ दिया और अपनी ही पार्टी में विवाद खड़ा कर दिया, वह शख्स न तो कभी देश को एक रख पाएगा, न ही देश उसे स्वीकार करेगा।’

कांग्रेस महासचिव कहते रहे हैं कि मोदी उनकी पार्टी के लिए कोई मुद्दा नहीं हंै। संवाददाताओं ने जब उनसे कहा कि भाजपा द्वारा मोदी को प्रधानमंत्री पद का उम्मीदवार घोषित करने की स्थिति में कांग्रेस नेतृत्व को आगामी आम चुनावों में उनसे (मोदी से: ही लोहा लेना पड़ेगा, तो उन्होंने जवाब दिया, ‘हमारा मुकाबला किसी व्यक्ति से नहीं, बल्कि उस विचारधारा से है जो सांप्रदायिक कटुता फैलाती है। यह विचारधारा गरीबों व अनुसूचित जाति-जनजाति समुदाय की विरोधी और बड़े उद्योगपतियों की पोषक है।’

उन्होंने भाजपा पर हमला करते हुए कहा कि वह देश में हमेशा से धार्मिक धु्रवीकरण के जरिए अलगाव पैदा करती रही है। कांग्रेस महासचिव ने उत्तरप्रदेश के मुजफ्फरनगर में हुए हालिया दंगों के पीछे भी भाजपा की साजिश का आरोप लगाया।

इंदौर की एक अदालत में दायर याचिका में दिग्विजय पर आरोप लगाया गया है कि उन्होंने वर्ष 1998 मेें मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री रहने के दौरान कायदों को दरकिनार करते हुए स्वयंभू संत आसाराम के निजी ट्रस्ट को यहां करीब सात हेक्टेयर सरकारी जमीन ‘गुरुदक्षिणा’ के रूप में आवंटित कर दी थी। आरोप है कि महज एक रुपये के वार्षिक भू-भाटक (लीज रेंट) पर हुए इस विवादास्पद जमीन आवंटन से सरकारी खजाने को करीब पांच करोड़ रुपए का नुकसान पहुंचा था। इन आरोपों के बारे में पूछे जाने पर दिग्विजय ने नाबालिग लड़की के यौन शोषण मामले में न्यायिक हिरासत के तहत जेल में बंद आसाराम से खुद को अलग कर लिया।

उन्होंने कहा, ‘मेरे एक ही गुरु हैं और वह हैं शंकराचार्य स्वरूपानंद सरस्वती। जब मैं मुख्यमंत्री था, तब आसाराम को जमीन देने की सिफारिश सभी पार्टियों ने की थी। इसके बाद मैंने मंत्रिमंडल की मंजूरी के जरिए उनके ट्रस्ट को इंदौर में जमीन आवंटित की थी। लेकिन उस वक्त किसे पता था कि आसाराम इस चरित्र के होंगे और इस तरह का काम करेंगे।’

कांग्रेस महासचिव ने कहा, ‘ऐसे व्यक्ति के ट्रस्ट को दी गई जमीन की लीज तत्काल निरस्त की जानी चाहिये और यह भूमि वापस ली जानी चाहिए।’

अधिकारियों ने बताया कि जिला प्रशासन को हालिया जांच में पता चला कि खंडवा रोड पर लीज की सरकारी जमीन पर खड़े आसाराम आश्रम मे न केवल लीज डीड की शर्ता का उल्लंघन किया गया, बल्कि शासकीय भूमि पर अतिक्रमण और गैरकानूनी निर्माण भी कर लिया गया। इस खुलासे के बाद प्रशासन ने आश्रम के संचालकों को तीन नोटिस जारी करके जवाब तलब किया है।

अधिकारियों के मुताबिक दिग्विजय की अगुवाई वाली तत्कालीन कांग्रेस सरकार ने आसाराम के ट्रस्ट को योग केंद्र और औषधि उद्यान विकसित करने के लिये लीज पर जमीन दी थी। लेकिन लीज डीड की शर्तों को तोड़ते हुए इस जमीन पर एक स्कूल भी खोल लिया गया जिसे व्यावसायिक तौर पर चलाया जा रहा है।

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