

झेलनी होगी चुनौती
भाजपा के वरिष्ठ नेताओं और विधायकों से सामंजस्य भी बिठाना होगा। वहीं दिल्ली की राजनीति में हावी पंजाबी और वैश्य नेताओं की चुनौती भी झेलनी होगी।
भाजपा के राष्ट्रीय नेतृत्व ने सतीश उपाध्याय को अध्यक्ष की कुर्सी सौंप कर दिल्ली की राजनीति में एक बड़ा फेरबदल किया है।
आसान नहीं होगी भाजपा के नए मुखिया की राह

क्यों आसान नहीं है सतीश की राह?
हालांकि सतीश के पास अनुभव की कमी नहीं है। उन्हें संगठन चलाने का अनुभव है। पार्टी में वह युवा मोर्चा अध्यक्ष, उपाध्यक्ष और मीडिया प्रमुख भी रह चुके हैं लेकिन कार्यकर्ताओं में जान फूंकना मेहनत का काम होगा।
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उन्हें संगठन की मजबूती के लिए एक अच्टी टीम तैयार करनी पड़ेगी। प्रदेश कार्यकारिणी जिसमें महामंत्री, मंत्री, उपाध्यक्ष, मोर्चा का गठन भी करना आसान नहीं होगा क्योंकि जिसे पद नहीं मिलेगा वही मुखालफत में झंडा बुलंद कर देगा और गुटबाजी शुरू हो जाएगी।
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हर्षवर्धन भी नहीं झेल पाए ये चुनौती
अब देखना होगा कि सतीश नये चेहरों को अपनी टीम में शामिल करते हैं या पिछले अध्यक्ष की टीम के साथ ही मिलजुल कर काम करते है। उधर, अपने विपक्षियों की चाल को भी समझने की जरूरत होगी।
नए प्रदेश अध्यक्ष सतीश उपाध्याय ने कहा- ‘छात्र राजनीति से उठकर आया व्यक्ति आज प्रदेश अध्यक्ष है। मैं सभी बड़े छोटे पार्टी नेताओं, कार्यकर्त्ताओं को सम्मानपूर्वक साथ लेकर कार्य करूंगा। गैर राजनैतिक परिवार से आया हूं और सभी वर्ग को साथ लेकर चलूंगा। आम आदमी पार्टी मेरे सामने कोई चुनौती नहीं है।’
