आसान नहीं है बैंक नोट की डुप्लीकेसी करना

काशीपुर। जालसाज भले ही कई जतन कर जाली नोट चलाने की कोशिश करें। मगर पकड़ में आ ही जाते हैं। मिनिस्ट्री ऑफ फाइनेंस के करेंसी नोट प्रेसों में बैंक नोट तीन स्तरों की प्रिंटिंग से होकर गुजरता है। इसके डुप्लीकेट नोट न तैयार हों इसलिए इसे तीसरे स्तर की खास इंटेग्लो प्रिंटिंग से छापा जाता है ताकि दृष्टिहीन भी नोट में हाथ लगाकर इसके उभरे हुए सतहों को महसूस कर सकें।
जसपुर में 10 रुपये के स्टांप पेपर से दो 100-100 के नोट तैयार करने का मामला पकड़े जाने पर अमर उजाला ने महाराष्ट्र के नासिक रोड स्थित करेंसी नोट प्रेस (सीएनपी) के एक वरिष्ठ अधिकारी से राय जानी। नाम न छापने की शर्त पर उन्होंने बताया कि पहले स्टांप पेपर में गवर्मेंट ऑफ इंडिया लिखा होता था। लेकिन तेलगी स्टांप पेपर घोटाले के बाद रिजर्व बैंक ने स्टांप पेपर में इसके स्थान पर सुरक्षा धागे की व्यवस्था कर दी। अहम यह है कि स्टांप पेपर के उलट बैंक नोट में इस्तेमाल होने वाले सुरक्षा धागे में हिंदी और अंग्रेजी में आरबीआई और भारत लिखा होता है। उन्होंने बताया कि अगर जसपुर में स्टांप पेपर से 100 के नोट बनाकर बाजार में उतारे गए हैं तो उनमें प्रयुक्त सुरक्षा धागे में आरबीआई और भारत नहीं लिखा होगा।
जसपुर में 10 रुपये के स्टांप पेपर से तैयार नकली नोट में सुरक्षा धागा बाएं छोर से 4.1 सेंटीमीटर में है। जबकि असली बैंक नोट में सुरक्षा धागा बाएं छोर से 9.1 सेंटीमीटर में है।
वहीं बैंक नोट लैटर प्रेस, ऑफसेट और इंटेग्लो तकनीक के इस्तेमाल के बाद तैयार होता है। सीएनपी के अधिकारी ने बताया कि स्टांप पेपर में बाएं ओर सुरक्षा धागा होता है। वहीं बैंक नोट में वाटर मार्क (जल चिन्ह) देखने के लिए नोट का जो भाग बायीं तरफ अनप्रिंटेड छोड़ा जाता है। उसमें गांधी जी उकेरे जाते हैं। उसका स्थान निर्धारित है। जबकि सुरक्षा धागा चित्र के दाएं ओर होता है। गांधी जी के चित्र वाले स्थान में सुखाया गया पानी होता है।

Related posts