
नई दिल्ली। गांधीनगर सामूहिक दुष्कर्म मामले में अदालत ने आरोपियों के लिए सरकारी खर्च पर वकील (न्याय मित्र) की नियुक्ति कर दी है। इस मामले में एक जुलाई को आरोपों पर बहस शुरू होनी थी, लेकिन बचाव पक्ष की ओर से वकील न होने के कारण सुनवाई टल गई। इसके मद्देनजर विशेष पोक्सो न्यायाधीश संजय गर्ग की अदालत ने अधिवक्ता गौरव वशिष्ठ की न्याय मित्र के तौर पर नियुक्ति की है।
पुलिस ने इस मामले में 25 जून को आरोपी मनोज व प्रदीप के खिलाफ प्रोटेक्शन ऑफ चिल्ड्रन फ्रॉम सेक्सुअल ऑफेंस (पोक्सो), हत्या के प्रयास, अपहरण, बंधक बनाने समेत कई धाराओं में आरोपपत्र दाखिल किया था। अदालत ने आरोपों पर बहस के लिए एक जुलाई तय की थी, लेकिन आरोपियों के पास कोई वकील न होने के कारण सुनवाई नहीं हो सकी।
मामले के अनुसार, आरोपियों ने अपनी ही बिल्डिंग में रहने वाली पांच साल की बच्ची को अगवा कर उससे 16 अप्रैल को दुष्कर्म किया था। दुष्कर्म के बाद आरोपी बच्ची को कमरे में बंद कर मौके से फरार हो गए। पुलिस ने करीब 40 घंटे बाद बच्ची को आरोपी के बंद कमरे से बरामद किया था। दिल्ली पुलिस ने मनोज को मुजफ्फरपुर से 20 अप्रैल को गिरफ्तार कर 21 अप्रैल को ड्यूटी एमएम के समक्ष पेश किया था। आरोपी प्रदीप को पुलिस ने बिहार के शेखपुरा जिले से 28 अप्रैल को गिरफ्तार किया था।
