
शिमला। प्रदेश सरकार से ठोस आर्थिक सहायता नहीं पाने वाले खेल संघ आरटीआई के दायरे में नहीं आते हैं। राज्य सूचना आयोग ने एक महत्वपूर्ण फैसले में सहकारी सभा के रूप में पंजीकृत राज्य फुटबॉल संघ को आरटीआई एक्ट के दायरे से बाहर बताया है। वर्तमान में फुटबॉल संघ के अध्यक्ष मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह के विशेष कार्य अधिकारी अमितपाल सिंह हैं और वह आयोग के समक्ष हाजिरी दे चुके हैं।
यह निर्णय राज्य सूचना आयुक्त केडी बातिश की कोर्ट ने जिला मंडी की तहसील सदर के सैल मुहल्ला के निवासी परमानंद सैनी की अपील पर सुनाया है। सैनी ने आयोग के समक्ष दलील दी कि संघ को हिमाचल प्रदेश खेल परिषद से 25 से 75 हजार रुपये के बीच वार्षिक आर्थिक सहायता मिलती है। इसे सहकारी सभा के रूप में पंजीकृत किया गया है। अपीलकर्ता के अनुसार आरटीआई एक्ट इस हिसाब से इस संघ पर लागू होना चाहिए। संघ के जनसूचना अधिकारी यानी सचिव दीपक शर्मा की ओर से आरटीआई कोर्ट में अधिवक्ता विश्वभूषण पेश हुए। उन्होंने सात अक्तूबर 2013 की सुप्रीम कोर्ट की जजमेंट का हवाला देते हुए कहा कि सहकारी सभाएं अधिनियम के तहत पंजीकृत सोसाइटी पब्लिक अथॉरिटी नहीं है और यह आरटीआई एक्ट के तहत किसी सूचना को देने के लिए कानूनी तौर पर बाध्य नहीं है। आरटीआई एक्ट बताता है कि अगर गैर सरकारी संगठन को सरकार से ठोस आर्थिक मदद मिलती है, केवल तभी ही इसे पब्लिक अथॉरिटी माना जा सकता है। हिमाचल प्रदेश सूचना आयोग की फुल बेंच ने दीपक शर्मा बनाम कार्यकारी निदेशक वालंटियरी हेल्थ एसोसिएशन मामले में ठोस रूप से आर्थिक मदद को 5 दिसंबर 2012 को दिए एक निर्णय में परिभाषित किया है। इसे राजीव गांधी फाउंडेशन मामले में केंद्रीय सूचना आयोग ने भी स्पष्ट किया है। इसके तहत सरकारी ग्रांट या ऋण के रूप में मदद एक करोड़ रुपये से कम नहीं होनी चाहिए। या फिर यह 25 लाख रुपये से कम न हो और यह संबंधित संस्था के कुल व्यय के 75 प्रतिशत से कम न हो। हालांकि, हिमाचल प्रदेश फुटबॉल संघ हिमाचल प्रदेश खेल परिषद से नियमित आर्थिक सहायता प्राप्त कर रहा है। पर यह उतनी नहीं, जिसके तहत यह आरटीआई के दायरे में आए। इस दलील पर आयोग ने इसे आरटीआई के दायरे से बाहर माना। कहा कि राज्य खेल परिषद पब्लिक अथॉरिटी है, इसलिए संघ में ग्रांट के उपयोग की सूचना परिषद से ही ली जा सकती है। हालांकि, फुटबाल संघ को पारदर्शिता के लिए अपनी अधिकतर जानकारी अपनी वेबसाइट पर डालनी चाहिए, जिससे कि नागरिक इसी से जानकारी ले सकें।
