
शिमला। मुख्यमंत्री के विशेष कार्य अधिकारी अमित पाल सिंह आरटीआई कोर्ट में हाजिर हुए। उन्होंने आरटीआई की अपील नहीं सुनने के आरोप पर आयोग से मिले कारण बताओ नोटिस का खुद जवाब दिया। इस जवाब में उन्होंने हिमाचल प्रदेश फुटबाल एसोसिएशन में किसी अपील के मिलने से इनकार किया। ये भी कहा कि एसोसिएशन पर आरटीआई एक्ट लागू नहीं होता। राज्य सूचना आयोग में इस मामले पर अब 6 नवंबर को बहस रखी गई है। उसी के बाद अंतिम निर्णय आएगा।
मंडी निवासी परमानंद सैनी ने हिमाचल प्रदेश फुटबाल एसोसिएशन के नाहन स्थित कार्यालय से आरटीआई के तहत नौ बिंदुओं पर सूचना मांगी। यह सूचना बतौर जनसूचना अधिकारी संघ के महासचिव से मांगी गई। सैनी का कहना है कि उन्हें कोई जवाब नहीं दिया गया। मुख्यमंत्री के ओएसडी अमित पाल सिंह इस एसोसिएशन के अध्यक्ष हैं और सैनी ने उनके समक्ष बतौर अपीलेट अथारिटी अपील करने का दावा किया और कहा कि इसके बावजूद इस पर सुनवाई नहीं हुई। इस पर राज्य सूचना आयुक्त केडी बातिश के कोर्ट ने संघ के अध्यक्ष अमित पाल सिंह और महासचिव को कारण बताओ नोटिस भेजा। इसके जवाब को लेकर अमित पाल सिंह और दीपक शर्मा 8 अक्तूबर को खुद आयोग के समक्ष हाजिर हुए। उन्होंने जवाब में कहा कि उनके पास किसी तरह की अपील नहीं आई। दोनों ने कहा के एसोसिएशन को सरकार से रेगुलर एड नहीं मिलती। यह आरटीआई एक्ट के दायरे में नहीं आता, इसलिए इस अपील को खारिज किया जाए। उन्होंने कहा कि एसोसिएशन के बारे में सारी सूचनाएं इसकी वेबसाइट पर डाली गई हैं। इन्हें कोई भी देख सकता है। आयोग ने कहा कि यह एक महत्वपूर्ण सवाल है कि एसोसिएशन पर आरटीआई एक्ट लागू होता है कि नहीं। इस पर बहस के लिए दोनों ही पार्टियों को 6 नवंबर को 12 बजे आयोग की मजीठा हाउस स्थित कोर्ट में बुलाया गया है।
