आबकारी अफसरों की मिलीभगत से हुआ करोड़ों का घोटाला, सीआईडी की फोरेंसिक जांच रिपोर्ट में खुलासा

 शिमला
सांकेतिक तस्वीर

सार

  • 4300 करोड़ रुपये से ज्यादा के बहुचर्चित टेक्नोमैक घोटाला
  • घोटाले में सीआईडी को बड़ी सफलता हाथ लगी
  • आबकारी अफसरों की मिलीभगत से हुआ करोड़ों का घोटाला
  • सीआईडी की फोरेंसिक जांच रिपोर्ट में खुलासा

विस्तार

4300 करोड़ रुपये से ज्यादा के बहुचर्चित टेक्नोमैक घोटाले की जांच कर रही सीआईडी को बड़ी सफलता हाथ लगी है। फोरेंसिक लैब की रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि घोटाला करने वाली कंपनी की राज्य कर एवं आबकारी विभाग के तत्कालीन तीन अधिकारियों ने मदद की थी। तत्कालीन ईटीओ ज्योति स्वरूप, ईटीआई दीपक सत्ती और रमेश चौहान के फर्जी बिलों व वाउचरों पर हस्ताक्षर से कंपनी ने करोड़ों के कच्चे माल की हिमाचल में आमद और प्रदेश से बाहर उत्पादों की सप्लाई दिखाई।

बाद में बैंकों से भी हजारों करोड़ का लोन लेने में कंपनी को लाभ मिला। सूत्रों के अनुसार एसआईटी ने ज्योति स्वरूप, दीपक सत्ती और रमेश चौहान के खिलाफ अभियोजन मंजूरी के लिए फोरेंसिक रिपोर्ट सरकार को भेज दी है। मंजूरी मिलने के बाद तीनों आरोपियों के नाम शामिल कर एक और सप्लीमेंट्री चार्जशीट कोर्ट में दाखिल की जाएगी। सीआईडी के एसपी संदीप धवल की अध्यक्षता वाली एसआईटी ने अभी तक की जांच के बाद पांच अधिकारियों-कर्मचारियों को जांच में शामिल किया है। इनके खिलाफ पहले ही अभियोजन स्वीकृति मिल चुकी है।

एमडी पर भी कसा शिकंजा

सूत्रों का कहना है कि ज्योति स्वरूप, सत्ती और चौहान घपले के दौरान सिरमौर के बेहराल बैरियर पर तैनात थे। इसी बैरियर से टेक्नोमैक कंपनी ने करोड़ों का माल कागजों पर इधर से उधर किया जिसके बाद कंपनी का टर्नओवर और प्रोडक्शन कागजों में बढ़ गया और फिर उसने कई बैंकों के समूह से करोड़ों का लोन लेकर हड़प कर लिया।

दुबई पुलिस की हिरासत में चल रहे कंपनी के एमडी राकेश कुमार शर्मा पर सीआईडी अपनी पकड़ ढीली नहीं करना चाह रही। यही वजह है कि दुबई भेजने के लिए दस्तावेजों को जिस फर्म की मदद से अरबी भाषा में अनुवाद कराया जा रहा है, उससे अधिकारी लगातार संपर्क कर जल्द से जल्द भेजने को कह रहे हैं। सूत्रों का कहना है कि अगले हफ्ते तक अरबी भाषा में तैयार डोजियर मिलते ही उसे गृह व विदेश मंत्रालय की मदद से दुबई की अदालत में पेश किया जाएगा।

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