आपदा प्रभावितों की मदद को बढ़े हाथ

गढ़वाल। आपदा प्रभावित लोगों को राहत सामग्री पहुंचाने के लिए जहां विभिन्न संस्थाएं आगे आई हैं, वहीं प्रशासन भी सक्रिय हो गया है। संस्थाओं ने आपदा प्रभावित इलाकों में जाकर लोगों को रसद और अन्य जरूरी सामन बांटे, वहीं प्रशासन ने भी हेलीकॉप्टर और खच्चरों से ग्रामीणों तक राहत सामग्री पहुंचाई।

पीड़ितों की मदद में जुटी संस्थाएं
उत्तरकाशी। दिव्य ज्योति संस्थान ने मनेरी, डिडसारी गांव में राहत सामग्री बांटी। बुधवार को संस्थान के लोगों ने गंगा देव प्रतिमा सेवा ट्रस्ट के सहयोग से प्रभावितों को आटा, चावल, दाल वितरित किए। उधर, पुलिस ने शहर के 37 प्रभावित परिवारों को रसद और अन्य सामग्री वितरित की। एसपी जेआर जोशी के नेतृत्व में पुलिस कर्मियों ने काली कमली क्षेत्र और तांबाखानी के आपदा पीड़ित परिवारों को कंबल, चावल, तेल, आटा बांटा। पुलिस द्वारा प्रभावितों को 200 पैकेट राहत बांटी गई। इस मौके पर सीओ महेंद्र सिंह रावत, एसओ जगदंबा प्रसाद कुकरेती, एसआई गंगा सिंह आदि मौजूद थे।

एसएसबी ने एकत्र किए 22 लाख
रुद्रप्रयाग। उत्तराखंड आपदा में राहत-बचाव के लिए सशस्त्र सीमा बल लखनऊ के अधिकारियों-कर्मचारियों ने 22 लाख की सहायता राशि एकत्र की है। महानिरीक्षक सीमांत मुख्यालय अविनाश चंद्रा की प्रेरणा पर एकत्र उक्त धनराशि से आपदा प्रभावित क्षेत्राें में पीड़ितों को कंबल, कपड़े, बर्तन, राशन, औषधियां बांटी गई।
सशस्त्र सीमा बल के स्टॉफ ऑफिसर (प्रशासन) केसी डोभाल के नेतृत्व में बीएसएफ की 40 सदस्यीय टीम ने चंद्रापुरी, गबनी, भटवाड़ीसेण में आपदा राहत शिविर में 230 परिवारों को राहत सामग्री वितरित की। बताया कि टीम में सेनानायक (चिकित्सा) प्रदीप जोशी, उप सेनानायक बीसी जोशी, मुख्य चिकित्साधिकारी एस हालदर समेत 40 जवान शामिल हैं।

हेलीकॉप्टर से भेजी राहत
गोपेश्वर। जिला प्रशासन ने बुधवार को थराली और जोशीमठ प्रखंड के आपदा प्रभावित गांवों में चार हेलीकॉप्टर से राहत सामग्री पहुंचाई। जोशीमठ के हनुमान चट्टी, बेनाकुली, खीरौं तल्ला, मल्ला, लामबगड़, बणघासी, विनायक, पांडुकेश्वर गांवों में हेलीकॉप्टर से रसद पहुंचाया गया। वहीं ग्वालदम से देवाल, जोशीमठ के लिए 20 केएल मिट्टी तेल भेजा गया। जिलाधिकारी एसए मुरुगेशन ने बताया कि नारायणबगड़ बाजार में सभी प्रभावितों को उचित मुआवजा दिया जाएगा। मलारी से आगे सड़क बंद होने की दशा में मलारी में स्थित खाद्यान्न गोदाम से खच्चरों में खाद्य सामग्री भेज दी गई है।

जनपद के गोदामों में खाद्यान्न की स्थिति
गेहूं 6432.43 क्विंटल
चावल 5884.12 क्विंटल
चीनी 197.50 क्विंटल
घरेलू गैस 1324 सिलेंडर
मिट्टी तेल 20 केएल

राहत सामग्री निपटाने में जुटे स्वयंसेवी
श्रीनगर। यूथ कांग्रेस के विभिन्न राज्यों से यहां पहुंचे स्वयंसेवी अब राहत सामग्री को किसी तरह निपटा देना चाहते हैं। युवा कांग्रेसी बताने में भी कतराते नजर आए कि उनके पास अब राहत के लिए कितनी सामग्री शेष है। दो दिन पूर्व तक राहत सामग्री के नाम पर आठ से 10 किलो आटा ही मिल रहा था, लेकिन अब इन पैकेटों में 20-25 किलो आटा भरा जा रहा है। कुल राहत सामग्री का रिकार्ड मांगे जाने पर बेस कैंप की कमान संभाल रहे जिम्मेदार स्वयंसेवी ने कुछ भी कहने से इंकार कर दिया। बेस कैंप प्रभारी विकास उपाध्याय ने सिर्फ इतना कहा कि अब बहुत अधिक सामान शेष नहीं है।

फोटो फाइल नेम-03जीओपी07.जेपीजी

एनटीपीटीसी ने बांटी राहत सामग्री
जोशीमठ। तपोवन-विष्णुगाड़ हाइड्रो पावर प्रोजेक्ट की पुनर्वास एवं पुर्नस्थापन गतिविधि के तहत एनटीपीसी द्वारा रविग्राम में अनुसूचित जाति के ग्रामीणों को सामूहिक उपयोग के लिए बर्तन, टेंट वितरित किए गए। परियोजना के महाप्रबंधक त्रिभुवन नाथ श्रीवास्तव द्वारा यह सामग्री वितरित की गई। पुलिस अधीक्षक अजय जोशी के नेतृत्व में बुधवार को जोशीमठ राहत कैंप में पुलिस ने पुलना, भ्यूंडार गांव के प्रभावितों को खाद्यान्न व कंबल वितरित किए। वहीं, जनदेश स्वयं सेवी संस्था ने पांडुकेश्वर और गोविंदघाट में प्रभावितों को राहत सामग्री वितरित की।

238 परिवारों को भेजा डेढ़ क्विंटल चावल
रुद्रप्रयाग। गुप्तकाशी से ल्वारा में प्रशासन ने राहत सामग्री भिजवाई, लेकिन यह राहत सामग्री ग्राम प्रधान के लिए जी का जंजाल बन गई। ग्राम प्रधान विजया भट्ट ने बताया कि प्रशासन ने तीन कट्टे चावल, नौ पेटी अचार, 11 टिन रिफाइंड ऑयल, नौ कंबल, तीन कट्टे चीनी, एक पेटी दूध पाउडर, दो पेटी बर्तन, दो पैकेट मोमबत्ती, 78 छाते, दो पेटी माचिस, पांच पैकेट बिस्किट सहित अन्य कुछ सामग्री भिजवाई।
गांव में 238 परिवार रहते हैं। ऐसे में राहत सामग्री कैसे वितरित होगी। नौ कंबल किसे देंगे या बर्तन किसे दे पाएंगे। राहत सामग्री के लिए सभी लोग आ रहे हैं। उन्होंने बताया कि अधिकारियों ने जो फोन नंबर दिए थे, उन पर संपर्क नहीं हो पा रहा है। ऐसे में क्या करें?

पुराने कपडे़ जलाए
राहत सामग्री के नाम पर कुछ मददगार पुरानी खाद्य सामग्री और कपडे़ भेज रहे हैं। जिनसे आपदा की चोट खाए लोग आहत हैं। बुधवार शाम सल्या-तुलंगा क्षेत्र में लोगों ने भेजे गए फटे-पुराने कपडे़ जला दिए।
अपनों को दे रहे राहत सामग्री
नारायणकोटी क्षेत्र में लगे एक राहत शिविर से आपदा प्रभावित कोटमा गांव के लोगों को बैरंग लौटना पड़ा। बताया जा रहा है कि यहां कुछ लोग अपनी जान पहचान वालों को चुपचाप राहत सामग्री दे रहे थे, जबकि वे प्रभावित नहीं थे।

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