आपदा प्रबंधन के लिए अब सेना का सहारा

बागेश्वर। ग्लेशियरों के मार्ग पर द्वाली और कठलिया क्षेत्र में फंसे सैलानियों को अभी तक वहां से निकाला नहीं जा सका है। प्रशासन और पर्यटन विभाग को अभी तक इन लोगों की स्थिति और संख्या के बारे में पुख्ता जानकारी नहीं है। वहां कम से कम 75 यात्री और लगभग दो सौ भेड़पालकों के फंसे होने की आशंका है। रेस्क्यू के लिए मंगलवार को गई टीमें खाती से आगे नहीं बढ़ पाई हैं। बुधवार शाम आपदा प्रबंधन विभाग और सेना का एक 79 सदस्यीय बचाव दल वहां के लिए रवाना हो गया है।
उपजिलाधिकारी सदर फींचाराम चौहान और जिला नियंत्रण कक्ष के प्रभारी योगेश मैनाली ने बताया कि पिंडारी मार्ग पर नंदा राजजात यात्रा के प्रशिक्षण को गए चंपावत के 30 छात्रों, प्रशिक्षकों और पोर्टरों सहित लगभग 60 लोगों के फंसे होने की आशंका है। इनमें कुछ स्थानीय लोग भी शामिल हैं। यह लोग द्वाली क्षेत्र में फंसे हैं। केएमवीएन ने इस दल के ठहरने की व्यवस्था की है। सुंदरढुंगा ग्लेशियर के मार्ग पर कठेलिया के आसपास दिल्ली के पर्यटक परिवार, पोर्टर, गाइड सहित कम से कम 15 लोग हो सकते हैं। ग्लेशियरों के मार्ग पर कम से कम 75 यात्रियोें के फंसे होने की आशंका है। जिलाधिकारी बीएस मनराल ने बताया कि सोमवार को गए दोनों रेस्क्यू दल पिंडर नदी की बाधा के कारण खाती में रुक गए हैं। रेस्क्यू का यह प्रयास सफल नहीं हो पाने के कारण सेना की मदद ली जा रही है। रानीखेत से गोरखा राइफल के दो अधिकारी, तीन जेसीओ सहित कुल 74 सदस्य बचाव कार्य के लिए रवाना हो गए हैं। इनके साथ आपदा प्रबंधन प्रशिक्षक भुवन चौबे और पुलिस के चार रेस्क्यू कर्मी भी हैं। विधायक ललित फर्स्वाण इस 79 सदस्यीय टीम को लेकर बुधवार की शाम लोहारखेत रवाना हुए। इधर, विधायक ललित फर्स्वाण का कहना है कि ग्लेशियरों के रास्तों पर सिर्फ पर्यटक ही नहीं, स्थानीय लोग भी फंसे हैं। उच्च हिमालय का यह इलाका विस्तृत क्षेत्र में फैला है यहां के दर्जनों गांवों में बकरी चराने वाले अनवाल रहते हैं, जो आजकल बुग्यालों में आवागमन करते हैैं। कई लोग रूटों पर सामान ढोने और अन्य कार्यों के लिए जाते हैं। वहां विभिन्न इलाकों में कम से कम दो सौ ग्रामीणों के फंसे होने की भी आशंका है। रेस्क्यू कार्यों के दौरान इनकी भी मदद की जाएगी।
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रैस्क्यू टीम के लिए भी आसान नहीं राह
बागेश्वर। सेना के बचाव दल का मार्गदर्शन कर रहे आपदा प्रबंधन विभाग के प्रशिक्षक भुवन चौबे ने बताया कि कठलिया फंसे पर्यटक दल को सुरक्षित निकालने के लिए बाछम के उमला में पिंडर पर सुरक्षित बचे पुल का सहारा लिया जा सकता है। सुंदरढुंगा मार्ग पर कठलिया से यह दल सोडिंग, सोराग, उमला बाछम होते हुए धाकुड़ी आ सकता है। उन्होंने बताया कि द्वाली में फंसे लोगों को निकालना बड़ी चुनौती है। रेस्क्यू टीम बुधवार शाम लोहारखेत तक ही जा सकेगी। बृहस्पतिवार को पहले खाती के पास पिंडर को और बाद में मैकतोली गाड़ नदी को पार करने के लिए रस्सियों से पुल बनाने पड़ेंगे। इसके बाद ही द्वाली तक पहुंचा जा सकता है। बृहस्पतिवार की शाम तक रेस्क्यू शुरू हो सकेगा।

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