
गढ़वाल। चुनावों के दौरान सुख दु:ख की हर घड़ी में जनता के साथ खड़े होने की कसम खाने वाले कई नेता आपदा की इस घड़ी में भी अपनी जनता के नहीं हुए। बृहस्पतिवार को हमने आपदा प्रभावित क्षेत्रों के विधायकों की इलाके में मौजूदगी के बारे में जानकारी ली तो मालूम हुआ कि आपदा पांच दिनों बाद कई विधायक अपने क्षेत्र में नहीं पहुंचे हैं। उत्तरकाशी जिले में भी प्रकृति ने भारी तबाही मचाई है। इसके बावजूद पुरोला के विधायक मालचंद आज भी देहरादून में ही डटे हुए हैं। जबकि थराली के विधायक मध्य प्रदेश में चुनाव अभियान में जुटे हैं।
रुद्रप्रयाग जिले में आपदा में पूरी केदारघाटी तबाह हो गई है, इसके बावजूद रुद्रप्रयाग के विधायक हरक सिंह रावत और केदारनाथ की विधायक शैलारानी रावत की चिंता हवाई सर्वेक्षण तक सीमित रही है। 16 जून को हुई भारी तबाही के बाद कृषि मंत्री हरक सिंह रावत 18 जून को जिले में पहुंचे थे। हवाई सर्वेक्षण कर वह लौट गए। विधायक शैलारानी सड़कें बंद होने से अगस्त्यमुनि में फंस गई थी। उन्हें 19 जून को चॉपर के जरिए अगस्त्यमुनि से रुद्रप्रयाग लाया गया। इसके बाद मैडम भी उड़नखटोले से केदारनाथ क्षेत्र का हवाई सर्वेक्षण कर लौट गईं। भाजपा जिलाध्यक्ष विजय कपरवाण एवं महामंत्री महावीर पंवार का आरोप है कि मंत्री-विधायक केवल हवाई दौरा कर जनता की गाढ़ी कमाई लुटा रहे हैं।
गंगोत्री और यमुनोत्री विधायक हालांकि प्रभावित इलाकों में पहुंचे हैं पर जनता को विधायकों से आश्वासन के सिवाय कुछ नही मिला है। प्रभावित अपना पुनर्वास चाहते हैं। चमोली जिले के थराली विधानसभा क्षेत्र में नारायणबगड़, थराली और देवाल ब्लाक आपदा से प्रभावित है, लेकिन यहां के विधायक डा. जीतराम का अभी तक क्षेत्र में नहीं पहुंचे हैं। आपदा के कहर से डर-सहमे लोग जीजीआईसी और जीआईसी नारायणबगड के कैंप में शरण लिए हुए हैं। उन्हें मदद की दरकार है, पांच दिनों बाद भी विधायक ने उनकी सुध नहीं ली है। विधायक जी मध्य प्रदेश में कांग्रेस पार्टी के चुनाव पर्यवेक्षक बनकर वहां चुनावी हलचल में मस्त हैं। हमने विधायक की लोकेशन जाननी चाहिए तो विधायक जी बोले- मध्य प्रदेश में हूं। वापस लौट रहा हूं।
कर्णप्रयाग के विधायक डा. एपी मैखुरी की भी लगातार अपने क्षेत्र में सक्रियता बनी हुई है। बृहस्पतिवार को उन्होंने बदरीनाथ हाईवे पर प्रेमनगर, आईटीआई सहित पुराने पुल के समीप पिंडर नदी के तेज बहाव से हुए नुकसान जायजा लिया।
