आदि हिमानी चामुंडा मंदिर राख

चामुंडा (कांगड़ा)। धौलाधार रेंज में पहाड़ियों पर स्थित आदि हिमानी चामुंडा मंदिर राख हो गया है। मंदिर के नीचे पहाड़ियों में बुरांस के फूल लाने गए डाढ के चार युवक यह दावा कर रहे हैं। मंदिर अधिकारी सुरजन सिंह और पूर्व न्यासी धर्मपाल ने योल पुलिस चौकी में इस संबंध में रिपोर्ट दर्ज करवा दी। मंदिर अधिकारी सुरजन सिंह और पुलिस चौकी योल के प्रभारी अजय कुमार ने बताया कि अभी मौसम साफ नहीं है, ऐसे में अभी मंदिर स्थल तक पहुंचना नामुमकिन है। जैसे ही मौसम साफ होगा, आदि हिमानी चामुंडा मंदिर में जाकर आगजनी का जायजा लिया जाएगा। उन्होंने बताया कि अभी तक आग लगने के कारणों का पता नहीं चल पाया है।
पंकज, अनिल, रवि, निक्कू का कहना है कि वह आदि हिमानी चामुंडा के नजदीक ही बुरांस के फूल लाने गए थे। उन्होंने आदि हिमानी मंदिर से धुआं उठता हुआ देखा। इसके बाद उन्होंने मंदिर की ओर कूच कर दिया। वहां पहुंचकर देखा मंदिर जलकर पूरी तरह राख हो चुका था। युवकों ने मंदिर से लौटकर मंदिर के पूर्व न्यासी धर्मपाल को मामले की जानकारी दी। धर्मपाल ने शुक्रवार सुबह मंदिर अधिकारी सुरजन सिंह को घटनाक्रम के बारे में बताया।

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प्रशासनिक लापरवाही बनी अग्निकांड की वजह : रशपाल
कंडकरड़ियाणा के पूर्व प्रधान रशपाल ने आरोप लगाया कि आदि हिमानी चामुंडा मंदिर में आगजनी प्रशासनिक लापरवाही की वजह से लगी है। इससे पहले इस मंदिर में चोरियां भी हो चुकी हैं। जब से यह मंदिर ट्रस्ट के अधीन लिया गया है तब से इसकी उचित रूप से देखरेख नहीं हो रही। बताया जा रहा है कि मंदिर में आग एक हफ्ता पहले से लगी थी। कई दिनों से मंदिर सुलग रहा था। वीरवार रात को बारिश होने पर आग बुझने लगी।
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डीसी ने दिए न्यायिक जांच के आदेश
जिला उपायुक्त सी पालरासु ने बताया उन्होंने तहसीलदार एवं मंदिर अधिकारी चामुंडा सुरजन सिंह को न्यायिक जांच के आदेश दे दिए हैं। मौसम साफ होते ही टीम आदि हिमानी चामुंडा मंदिर स्थल तक पहुंचेगी और वहां माता की पुरातन मूर्ति को रिकवर किया जाएगा।
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सर्दियों में बंद हो जाते हैं मंदिर के कपाट
यह मंदिर धर्मशाला-पालमपुर रोड पर स्थित चामुंडा मंदिर से करीब 10 किलोमीटर दूर 2920 मीटर की उंचाई पर स्थित है। इस मंदिर को रास्ता जिया गांव से शुरू होता है। कई वर्षों से इस पुरातन मंदिर से रोप वे बनाने की कवायद भी चल रही है। यहां शिव भगवान और हनुमान का छोटा सा मंदिर भी है। 15 नवंबर से 15 मार्च तक चार माह के लिए मंदिर के कपाट बर्फबारी के चलते बंद हो जाते हैं। मंदिर में सुबह-शाम आरती होती है। जिया से मंदिर तक पहुंचने का मार्ग काफी दुर्गम है।
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मंदिर का इतिहास
सिद्घपीठ हिमानी चामुंडा का मंदिर निर्माण बहुमूल्य लकड़ी से किया गया है। कहा जाता है कि 1670 ई. में यहां चंद्रभान राजा छिपा था। मुगल उसे ढूंढते हुए मंदिर तक पहुंच गए और राजा पर हमला कर दिया था। राजा माता का भक्त था। मां की अपार कृपा होने पर राजा ने मुगलों को मार गिरा दिया था। यह मंदिर 15वीं सदी का बताया जाता है। इसक बाद पीडी सैणी ने 3 जुलाई 1993 को मंदिर का संरक्षण करना शुरू किया। दस वर्ष के कठोर परिश्रम के बाद भवन निर्माण हुआ। 2003 में यहां माता की मूर्ति की स्थापना की गई । धर्मशाला-पालमपुर मार्ग पर चामुंडा मंदिर बाद में बनाया गया है। आदि हिमानी चामुंडा मंदिर ही माता का मूल निवास स्थान है।

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