आदिम जनजाति के लिए संघर्ष करेगा बरपटिया समाज

पिथौरागढ़। बरपटिया समुदाय ने आदिम जनजाति श्रेणी में रखने की मांग की है। इसे लेकर यह समुदाय लगातार आवाज उठाता रहा है। मगर अनसुनी होने से आहत होकर अब उसने आंदोलन की चेतावनी दी है।
बरपटिया जनजाति उत्थान समिति के महासचिव रुद्र सिंह पापड़ा का कहना है कि बरपटिया समुदाय उपेक्षा के चलते विकास की धारा से कटा हुआ है, जबकि बरपटिया समुदाय के लोग मुनस्यारी के मूल निवासी हैं, लेकिन लगातार हो रही अनदेखी ने उनके आगे बढ़ने के रास्ते रोक दिए हैं। कहा गया कि यह समुदाय अब भी सड़क से 15 से 20 किमी दूर है। पापड़ा ने कहा कि 1967 में बरपटिया समाज को अनुसूचित जनजाति की श्रेणी में रखा गया, जबकि सीमांत के प्रहरी के रूप में विख्यात इस जाति को आदिम जनजाति के दायरे में रखना विकास के लिए जरूरी था। इसके अलावा बपटिया गांव को मूलभूत सुविधाओं से जोड़ने और विकास के लिए अलग से बजट देने की मांग की गई है।
इस समाज ने 2005 से आदिम जनजाति की श्रेणी में रखे जाने के लिए कई बार प्रयास किए मगर हर बार उनकी पहल को नाकाम कर दिया गया। अब संगठन ने संघर्ष समिति के जरिए फिर से आंदोलन चलाने का ऐलान किया है।

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