आढ़तियों को देना होगा मंडी शुल्क

मंडी। हिमाचल प्रदेश कृषि एवं उद्यानिकी (विकास एवं विनियमन) अधिनियम 2005 के अंतर्गत आढ़तियों और व्यापारियों को एक प्रतिशत की दर से मंडी शुल्क देना जरूरी है। कृषि उपज मंडी समिति के सचिव और कार्यकारी अधिकारी नेत्र सिंह नायक ने कहा कि कृषि उपज मंडी समिति के पास जिला मंडी में फल सब्जी, करियाना, लकड़ी, फ्लोर मिल्स और अन्य कारोबार के 407 आढ़ती और व्यापारी पंजीकृत हैं। लेकिन, कुछ आढ़ती और व्यापारी बिना पंजीकरण के कारोबार कर रहे हैं तथा कुछ ने पंजीकरण आगामी वर्ष 2013-14 के लिए नवीनीकरण नहीं करवाया है। उन्होंने आढ़तियों से शीघ्र ही कृषि उपज मंडी में पंजीकरण करवाने को कहा। अन्यथा पांच गुणा कंपाउंड शुल्क की वसूली की जाएगी। अधिनियम के अनुसार आढ़तियों और व्यापारियों को एक प्रतिशत की दर से मंडी शुल्क देना जरूरी है। उन्होंने किसानों और बागवानों से आग्रह किया कि अपनी कृषि उपज को मंडियों में खुली बोली के माध्यम से उचित मूल्य पर बेचें और आढ़तियों से पक्का बिल लें। यदि कोई पंजीकृत आढ़ती किसानों को पक्का बिल (आर फार्म) व परचून के लिए माल खरीदने वालों को क्यू फार्म नहीं देता है तो इसकी लिखित शिकायत कृषि उपज समिति मंडी में करें। जिस पर समिति पंजीकृत आढ़ती के खिलाफ कार्रवाई कर जुर्माना, दुकान आवंटन और लाइसेंस रद करेगी। हिमाचल प्रदेश राज्य कृषि विपणन बोर्ड की ओर से अनाज, दालें, तिलहन, फल, सब्जी, रेशा, पशुधन उत्पाद, मिर्च मसाले, तंबाकू, लकड़ी और आयुर्वेदिक औषधि पर अधिनियम के प्रावधानों के अनुसार मार्केट फीस वसूली जाती है। उन्होंने बोर्ड के अध्यक्ष डा. सुभाष मंगलेट की अध्यक्षता में कमेटी का गठन किया गया, जो प्रदेश के प्रत्येक जिले का औचक निरीक्षण करेगी। निरीक्षण के दौरान अगर कोई आढ़ती और व्यापारी बिना पंजीकरण के कारोबार करते हुए पाया गया तो उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

Related posts