आईजीएमसी में अंधेर नगरी चौपट राजा!

शिमला। आईजीएमसी में अंधेर नगरी चौपट राजा की कहावत सटीक बैठ रही है। प्रबंधन स्टाफ नर्सिज से रोटेशन में ड्यूटी नहीं ले पा रहा। इमरजेंसी ड्यूटी देने में भी अधिकांश स्टाफ आनाकानी करता है। इतना ही नहीं 78 वार्ड सिस्टर में से महज 2 वार्ड सिस्टर की नाइट ड्यूटी दे रही हैं। 13 मैट्रन अस्पताल में मौजूद है, ये सभी एक ही कमरे में बैठती हैं। सुबह आती हैं और शाम को चली जाती हैं। इनके ऊपर तीन नर्सिंग सुपरिंटेंडेंट हैं, जिनका अपने स्टाफ पर कोई नियंत्रण नहीं। करीब 300 स्टाफ नर्सिज हैं। इनमें से भी अधिकांश लाइट ड्यूटी पर ही हैं। रोटेशन सिस्टम प्रबंधन लागू नहीं करता, इस वजह से चुनिंदा नर्सिज ही दिन रात ड्यूटी दे पा रही हैं। ये वे नर्सिज हैं, जिनकी राजनीतिक गलियारों तक पहुंच नहीं है।
ज्यादातर नर्सिज केवल ऐसी जगह पर ड्यूटी दे रही हैं, जहां सुबह से शाम तक का लाइट काम हो। वार्डों और आपरेशन थियेटरों में इस वजह से स्टाफ कम रहा है। इमरजेंसी ड्यूटी देने से ये बच रही हैं। लेकिन इमरजेंसी ड्यूटी के नाम पर हर साल मिलने वाले एक महीने का अतिरिक्त वेतन ले रही हैं। अस्पताल प्रशासन इनके आगे नतमस्तक है। हालांकि सरकार के समक्ष अपना पाक साफ दामन बताने के लिए 15 जून को अस्पताल प्रबंधन की ओर से एक लिखित में पत्र जारी किया गया है, जिसमें ड्यूटी से अनुपस्थित रहने वाली नर्सिज को अतिरिक्त वेतन न देने की चेतावनी दी गई है।

क्या कहता है प्रबंधन
वरिष्ठ चिकित्सा अधीक्षक डा. रमेश ने कहा कि सभी नर्सिज स्टाफ को रोटेशन में ड्यूटी लगाने के निर्देश जारी किए जा रहे हैं। व्यवस्था में सुधार लाया जा रहा है। किसी भी महिला कर्मचारी के साथ काम को लेकर कोई भेदभाव न हो, इसका प्रयास प्रबंधन कर रहा है।

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