
शिमला। शहर के लिए प्रस्तावित आईएसबीटी टूटीकंडी से रानी झांसी पार्क रोप-वे की सबसे बड़ी बाधा दूर होती दिख रही है। इस प्रोजेक्ट में वन भूमि बाधा नहीं बनेगी। प्रोजेक्ट के लिए टूटीकंडी, लिफ्ट नाला कार्ट रोड और जोधा निवास के पास जमीन चाहिए जो पीडब्ल्यूडी के नाम है। इन तीनों स्थानों पर गैर वन भूमि उपलब्ध है। साढ़े तीन किलोमीटर लंबे इस रोप वे को केवल रास्ता (राइट ऑफ वे) चाहिए जो देवदार के जंगलों से ऊपर होगा। इसमें केवल तीन पिल्लर होंगे। रोपवे की निर्माण तकनीक में पिल्लर जितने दूर हों, उसी अनुसार ऊंचाई रोपवे को दी जा सकती है। इसलिए, फोरेस्ट क्लीयरेंस की जरूरत नहीं है। शहरी विकास विभाग ने इन्फ्रास्ट्रक्चर बोर्ड को एक महीने में डीपीआर बनाने का काम दिया है जबकि जमीन नगर निगम देगा।
यहां वन भूमि इसलिए अहम मसला है, क्योंकि जब टूटीकंडी में इंटर स्टेट बस टर्मिनल (आईएसबीटी) के नए कांप्लेक्स का काम चांद खान कंस्ट्रक्शन को दिया गया था तो उस प्रोजेक्ट में भी रोपवे का प्रावधान था लेकिन फोरेस्ट लैंड होने के कारण बाद में संशोधन प्रोजेक्ट बना और रोपवे हटा दिया गया। लेकिन, अब रोपवे बनने से न केवल आईएसबीटी को लाभ मिलेगा बल्कि टूटीकंडी के आसपास प्रॉपर्टी के दाम भी बढ़ेंगे। इस रोप वे की लंबाई करीब साढे़ तीन किलोमीटर होगी। प्रारंभिक लागत 250 करोड़ आंकी गई है। रोपवे की एकतरफा क्षमता 1500 से 2000 व्यक्ति प्रति घंटा होगी। एक तरफ की यात्रा में लगभग 10 मिनट का समय लगेगा। इसे जाखू रोपवे से जोड़ने का भी प्रस्ताव है।
मसूरी के प्रोजेक्ट की स्टडी होगी
मसूरी में पहाड़ और देवदारों के बीच रोपवे बना है। इनमें भी पेड़ों को काटने की जरूरत नहीं पड़ी थी। शहरी विकास मंत्री सुधीर शर्मा ने इस प्रोजेक्ट की स्टडी करने को भी कहा है ताकि बाद में आने वाली दिक्कतों का अंदाजा पहले लगाया जा सके। साथ ही इस प्रोजेक्ट को दोहरे प्रयोग का बनाया जा रहा है। यानी, इसमें हिंडोले लोगों के लाने ले जाने के अलावा सामान भी ढो सकेंगे। इसके लिए स्टोपेज पर सामान के लिए विकल्प के तौर पर अलग हिंडोला रखा गया होगा।
रोप वे बिल्ट, ऑपरेट एंड ट्रांसफर पॉलिसी पर बनेगा। निजी निवेशक को 40 साल तक प्रोजेक्ट दिया जाएगा और कमाई में प्रदेश सरकार का भी हिस्सा होगा। यह शहर में टूरिज्म बढ़ाने के लिए मील का पत्थर होगा। सर्दियों में बर्फ से ढके शिमला के ऊपर से गुजरते हिंडोले पर्यटकों के लिए नया अनुभव होंगे।
– सुधीर शर्मा, शहरी विकास मंत्री
नगर निगम को जमीन के दस्तावेज उपलब्ध करवाने को कहा है। इसके बारे में हमारे पिछले अनुभव अच्छे नहीं रहे हैं इसलिए इस बार समयबद्ध तरीके से काम होगा। हम कंसल्टेंट लगा रहे हैं। उसकी रिपोर्ट पर ही ओपन ग्लोबल बिडिंग होगी। राहत की बात है कि इस प्रोजेक्ट में फारेस्ट लैंड का पचड़ा नहीं है।
अनिल कपिल, महाप्रबंधक, इन्फ्रास्ट्रक्चर डिवेल्पमेंट बोर्ड
