
उत्तरकाशी। बाढ़ से जोशियाड़ा-तिलोथ में बेघर हुए परिवारों की शासन-प्रशासन सुध लेने को तैयार नहीं है। रिश्तेदारों और सरकारी स्कूलों में शरणार्थी के रूप में रह रहे परिवारों के सामने संकटों का पहाड़ टूट गया है।
सात दिन पहले आई बाढ़ से उत्तरकाशी के जोशियाड़ा तथा तिलोथ क्षेत्र के दर्जनों भवन के बाढ़ में समा गए थे। कुछ भवन खतरे की जद में आने से सैकड़ों परिवार बेघर हो गए हैं। कुछ बाढ़ पीड़ितोंने सरकारी स्कूलों तथा कुछ ने रिश्तेदारों के यहां शरण ले रखी हैं। पीड़ित लगातार प्रशासन से विस्थापन की मांग कर रहे हैं, लेकिन उनकी कोई सुनने वाला नहीं है। ऐसे में प्रभावितों को चिंता सता रही कि वह कब तक शरणार्थियों की तरह जीवन यापन करेंगे। बाढ़ पीड़ित भगवान सिंह भंडारी, आनंद सिंह राणा और ऋषिराम बताते हैं कि वह भी कंसैण में रिश्तेदारों के यहां शरण लिए हुए हैं। ऐसे में प्रशासन को हमारा विस्थापन करना चाहिए। पीड़ित सूची में कई परिवारों को वंचित करने का आरोप भी प्रशासन के ऊपर लग रहा है। प्रशासन की लचर व्यवस्था को लेकर पीड़ितों में गुस्सा बढ़ता जा रहा हैं, जो जल्द ही आंदोलन का रूप ले सकता है।
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जोशियाड़ा में 27 भवन तो बाढ़ में समा गए थे, जबकि छह दर्जन से अधिक भवनाें को खतरा बना हुआ है। सैकड़ों परिवार बेघर हो रखे हैं। प्रशासन को जल्द से जल्द पीड़ितों का विस्थापन करना चाहिए। बाढ़ पीड़ित आंदोलन के लिए बाध्य होंगे।
विजेंद्री भट्ट, ग्राम प्रधान जोशियाड़ा
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जोशियाड़ा-तिलोथ के बेघर परिवारों को आहेतुक राशि दे दी गई है। फिलहाल कुछ परिवारों को स्कूल भवनाें में रखा गया है। शेष परिवार अपने रिश्तेदारों के यहां रह रहे हैं। प्रभावितों के साथ बैठक कर विस्थापन का प्रस्ताव सरकार को भेजा दिया जाएगा।
डा.आर. राजेश कुमार, डीएम उत्तरकाशी
