आंदोलनों के बीच लटका हजारों छात्रों का भविष्य

श्रीनगर। जुलाई माह में विश्वविद्यालय का नया शिक्षा सत्र शुरू हो चुका है। विश्वविद्यालय के अधिकारियों और कर्मचारियों का पूरा ध्यान शिक्षा सत्र को बेहतर बनाने पर होना चाहिए था, लेकिन विवि प्रशासन आंदोलनों से जूझ रहा है। शिक्षणेत्तर कर्मचारियों के आंदोलन के चलते बीएड प्रवेश परीक्षा परिणाम सहित कई कक्षाओं के परिणाम भी घोषित नहीं हो पा रहे हैं। 20 हजार से अधिक अंकतालिकाएं भी कालेजों में नहीं पहुंच पा रही हैं। यदि जल्द निर्णय नहीं लिया गया तो विवि का शैक्षणिक सत्र अनियमित हो सकता है।
पांच अगस्त से गढ़वाल विश्वविद्यालय में शिक्षणेत्तर कर्मचारियों के मांगों को लेकर अनिश्चितकालीन कार्य बहिष्कार के साथ आंदोलन शुरू हो गया। इसी दिन अंशकालिक शिक्षकों ने भी समायोजन और मानदेय की मांग को लेकर कुलपति का घेराव किया। हर दिन किसी न किसी मुद्दे को लेकर विवि में आंदोलन चल रहे हैं। ऐसे में विवि के शैक्षणिक सत्र के साथ ही डिग्री, माइग्रेशन, अंकतालिका और परीक्षा परिणाम संबधित कई कार्य प्रभावित होते हैं। मई माह में आयोजित बीएड प्रवेश परीक्षा का परिणाम तैयार होने के बावजूद कार्य बहिष्कार के चलते घोषित नहीं हो पा रहा। 16 हजार से अधिक छात्रों को बीएड प्रवेश परीक्षा परिणाम का इंतजार है। साथ ही बीए प्रथम वर्ष, एमए और एमएसी की विषयों का परीक्षा परिणाम भी कार्यबहिष्कार के चलते घोषित नहीं हो पा रहा। शिक्षणेत्तर कर्मचारियों के आंदोलन का अधिक लंबे समय तक चलने से विवि का शैक्षणिक सत्र अनियमित हो सकता है।

कार्यबहिष्कार की अपील की है
– 20 हजार से अधिक अंकतालिकाएं विभिन्न कालेजों को भेजी जानी थी, लेकिन आंदोलन के चलते अभी तक नहीं भेजी जा सकी हैं। साथ ही कई कक्षाओं के परीक्षा परिणाम भी घोषित किया जाना है। कर्मचारियों से छात्र हित में कार्य बहिष्कार वापस लेने की अपील की गई है। – प्रो. पीएस राणा, कुलसचिव, गढ़वाल विवि श्रीनगर।

विवि के रवैये से परेशान
विश्वविद्यालय प्रशासन कर्मचारियों को गुमराह कर रहा है। प्रशासन चाहे तो कर्मचारियों की सभी मांगों पर तुरंत कार्रवाई हो सकती है। विवि प्रशासन के अड़ियल रवैये से कर्मचारी और छात्र सभी परेशान हैं। – राजेंद्र सिंह भंडारी, अध्यक्ष, शिक्षणेत्तर कर्मचारी परिषद, गढ़वाल विश्वविद्यालय।

Related posts