आंगनबाड़ी वर्कर सरकारी कर्मचारी घोषित हों

मंडी। आंगनबाड़ी वर्कर्स एवं हेल्पर्स यूनियन सदर प्रोजेक्ट का सम्मेलन यहां आयोजित किया गया। इसकी अध्यक्षता सीटू के जिला प्रधान भूपेंद्र सिंह ने की। बैठक में आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं की मांगों पर चर्चा की गई। साथ ही यूनियन की पिछले तीन वर्षों की गतिविधियों की रिपोर्ट पेश की गई।
सम्मेलन में सीटू के जिला प्रधान भूपेंद्र सिंह ने कहा कि केंद्र और राज्य सरकार की नीतियां आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं के खिलाफ रही हैं। इस कारण आज तक उन्हें सरकारी कर्मचारी घोषित नहीं किया गया। कार्यकर्ताओं को पंजाब और हरियाणा के बराबर भी मानदेय नहीं दिया जा रहा है जबकि अन्य कर्मचारियों को पंजाब के बराबर वेतन और भत्ते दिए जाते हैं। इस प्रकार राज्य सरकार इन महिला कार्यकर्ताओं का शोषण कर रही है। उन्होंने कहा कि हरियाणा में 7500 और पंजाब में 6000 मानदेय मिल रहा है जबकि हिमाचल में केवल 3300 रुपये मानदेय दिया जा रहा है।
यूनियन की जिला प्रधान राजकुमारी ने कहा कि पोषाहार क्रय करने की जिम्मेवारी भी कार्यकर्ताओं को सौंप दी है। जो उन्हें अपनी जेब से खर्च करके क्रय करना पड़ता हैं। जिसका यूनियन विरोध करती हैं। उन्होंने नए आंगनबाड़ी केंद्रों को अभी तक गैस सिलेंडर सप्लाई नहीं किए गए हैं।
सम्मेलन में प्रस्ताव पारित किया गया कि तीन दिसंबर को स्वास्थ्य सेवाओं के निजीकरण व राशन कोटे में की गई कटौती के खिलाफ खंड स्तर पर प्रदर्शन किए जाएंगे। 12 दिसंबर को दिल्ली में होने वाली संसद मार्च में सदर प्रोजेक्ट से 50 कार्यकर्ता भाग लेगी।
सम्मेलन में यूनियन की नई प्रोजेक्ट कमेटी भी चुनी गई जिसमें प्रधान मंजू शर्मा, वरिष्ठ उपप्रधान उमावती, उपप्रधान रमा, तृप्ता, उर्मिला, शशिबाला, सचिव कृष्णा राण, सह सचिव पम्मी, निशा शर्मा, दुर्गा वैद्य, कृष्णा, कोषाध्यक्ष रमा, कार्यकारिणी सदस्य मधु, लीला, इंद्रा, माया, सुदर्शना, हमींद्री, पदमा, विमला, डोलमा, मीना शर्मा को चुना गया।

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