अस्पताल को सीएम की घोषणाएं पूरी होने का इंतजार

उत्तरकाशी। उत्तरकाशी के जिला अस्पताल में स्वीकृति के डेढ़ साल बाद भी सिटी स्कैन, एमआरआई और डिजिटल एक्सरे जैसी आधुनिक मशीनें नहीं लग पाई। ऐसे में मरीजों को खासी दिक्कतें झेलनी पड़ रही हैं।
जिला अस्पताल में उत्तरकाशी जिले के साथ ही टिहरी बांध प्रभावित क्षेत्र प्रतापनगर से भी मरीज भी इसी अस्पताल पर निर्भर हैं। इसके बाद भी अस्पताल में संसाधनों की कमी है। डेढ़ साल पहले सीएम की घोषणा पर स्वास्थ्य महकमे ने अस्पताल में सिटी स्कैन, एमआरआई और डिजिटल एक्सरे लगाने की स्वीकृत दी थी, लेकिन अभी तक यह मशीनें लग ही नहीं पाई जिससे मरीजों को जांच के लिए देहरादून दौड़ना पड़ता है।
गंगोत्री के पूर्व विधायक गोपाल रावत ने सीएम को ज्ञापन भेजकर अस्पताल में स्वीकृत आधुनिक मशीनें शीघ्र लगवाने की मांग की है।

जिला अस्पताल में सिटी स्कैन, एमआरआई और डिजिटल एक्सरे स्वीकृत हैं लेकिन अभी तक सिटी स्कैन और एमआरआई के लिए निदेशालय से आदेश नहीं मिला है। डिजिटल एक्सरे के लिए जल्द टेंडर प्रक्रिया की जाएगी।
डा.अनिल कुमार, सीएमएस, जिला अस्पताल, उत्तरकाशी।

शिलान्यास के बाद एक भी ईंट नहीं लगी
सरकारी फाइलों में ही सिमटा अस्पताल का निर्माण
चिकित्सा सुविधाओं की कमी से परेशान क्षेत्र के लोग
अमर उजाला ब्यूरो
नैनबाग(टिहरी)। प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र के उच्चीकरण का मामला प्रशासनिक सुस्ती की भेंट चढ़ गया है। वर्ष 2011 में स्वीकृति मिलने पर तत्कालीन मुख्यमंत्री ने भवन का शिलान्यास भी किया था लेकिन उसके बाद निर्माण के नाम पर एक ईंट भी नहीं रखी जा सकी।
वर्ष 2011 में अस्पताल का उच्चीकरण कर 31.39 लाख रुपये भवन निर्माण के लिए जारी किए थे। 20 दिसंबर 2011 को तत्कालीन मुख्यमंत्री भुवनचंद्र खंडूड़ी ने अस्पताल कक्ष और आवासीय भवन का शिलान्यास भी किया था लेकिन निर्माण कार्य इससे आगे नहीं बढ़ पाया। कार्यदायी संस्था भी अब तक 4.43 लाख खर्च कर चुकी है लेकिन भवन का निर्माण नहीं हो पा रहा है। क्षेत्र के किशन सिंह कैंतुरा, गंभीर सिंह रावत, सरदार सिंह राणा, व्यापार संघ के अध्यक्ष श्याम सिंह चौहान, मोहन निराला, विक्रम सिंह चौहान, राजेश कैंतुरा आदि ने अस्पताल का निर्माण जल्द शुरू करने की मांग की है। सीएमओ डा एसपी अग्रवाल ने बताया कि शासन स्तर पर प्रस्ताव लंबित है। बजट मिलने के बाद ही काम आगे बढ़ सकेगा।

अस्पताल के लिए नहीं मिल पा रही जमीन
अमर उजाला ब्यूरो
नई टिहरी। धनौल्टी का एलोपैथिक चिकित्सालय संसाधनों की कमी से जूझ रहा है। इसमें डाक्टर, फार्मासिस्ट और अन्य स्टाफ भी तैनात है लेकिन मरीजों के बैठने के लिए जगह नहीं है।
एक छोटे से कमरे में चल रहे चिकित्सालय में इमरजेंसी ट्रीटमेंट, डिलीवरी और अन्य उपचार भी नहीं हो पाता है। अलबत्ता ओपीडी के मरीजों को जरूर उपचार मिल रहा है। बरसात में पानी सीधे अंदर घुस जाता है।
ग्रामीण कमलेश कुमार, नरेंद्र सिंह बिष्ट, रतन सिंह बिष्ट का कहना है कि जमीन के अभाव का रोना रोकर प्रशासन चिकित्सालय की व्यवस्था बनाने में नाकाम साबित हो रहा है। यदि शासन-प्रशासन चिकित्सालय के प्रति गंभीर है तो पुरानी तहसील के खाली पडे़ भवनों पर चिकित्सालय को संचालित किया जा सकता है।
सीएमओ डॉ. एसपी अग्रवाल ने बताया कि पर्यटक स्थल होने के कारण धनोल्टी में सर्किल रेट पर जमीन नहीं मिल पा रही है। जिस कारण भवन नहीं बन पाया है। लोगों की समस्या को देखते हुए किसी तरह चिकित्सालय चलाया जा रहा है।

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