
कसौली (सोलन)। दीवारों पर सीलन, छत में टपकता पानी, जगह-जगह फर्श पर पडे़ गड्ढे। यह हालत है कसौली की गढ़खल-सनावर पंचायत के आयुर्वेदिक अस्पताल की। असुरक्षित घोषित हो चुके इस अस्पताल में आज भी रोजाना 60 से अधिक रोगी स्वास्थ्य जांच करवाने के लिए आते हैं। अब तो आयुर्वेदिक अस्पताल की दीवारों पर पीपल के पेड़ का कब्जा हो चुका है। दीवारों में जगह-जगह पर जडे़ं फैली हैं। अस्पताल करीब एक दर्जन पंचायतों का केंद्र पड़ता है। जिसमें ग्राम पंचायत गढ़खल-सनावर, कसौली-गढ़खल, गनोल, नाहरी, कोटबेजा, जाबली, जंगेशु, चामियां, जगजीतनगर, गांगुडी, हुडंग, कुठाड़ और कसौली छावनी शामिल हैं।
गढ़खल-सनावर पंचायत के उपप्रधान प्रभुदयाल अत्री ने बताया कि करीब तीन दशक पूर्व दो बीघा नौ बिस्वा जमीन ग्रामीणों ने दान की थी, जिस पर अब तीन कमरों का नया भवन बनाया है। भवन अभी अधूरा है। जिससे उस भवन में शिफ्ट करने के लिए भी परेशानी है। दो माह पूर्व उनकी अगुवाई में एक प्रतिनिधिमंडल मुख्यमंत्री से मिला। प्रतिनिधिमंडल ने मांग रखी की नए भवन में दस से बीस बेड का अस्पताल बनाया जाए। मुख्यमंत्री ने आश्वासन दिया कि लोगों की मांग को जल्द पूरा किया जाएगा। स्थानीय लोगों में देवेंद्र कुमार, रूकमणी देवी, सुनीता, अमर सिंह, लोकेश कुुमार, सुनिधी, महिमा, अजयदीप और सुरेश ने अस्पताल निर्माण की मांग उठाई है।
इस बारे में जिला आयुर्वेदिक अधिकारी डा. अजय महाजन बताया कि नया भवन तैयार हो चुका है। उसके रिटेनिंग वॉल और रास्ता बनना शेष है। उच्च अधिकारियों को इस बारे में अवगत करवाया जा चुका है। बजट आने के बाद दीवार लगा दी जाएगी तथा नए भवन में अस्पताल शिफ्ट कर दिया जाएगा।
