अशांत मन से नहीं होती प्रभु की भक्ति

मंडी। विश्व जागृति मिशन सत्संग के दूसरे दिन सुधांशु महाराज ने अपने प्रवचन में कहा कि संसार में आयु ऐसी चीज है, जो निरंतर घटती जाती है, जबकि तृष्णा ऐसी चीज है तो निरंतर बढ़ती जाती है। केवल ईश्वर का विधान ही ऐसा है, जो न कभी घटता है और न कभी बढ़ता है। तो ईश्वर के विधान को समझना चाहिए।
उन्होंने कहा कि कई बार ऐसा होता है कि मनुष्य अच्छे कामों को एक दिखावे में बदल देता है, मगर इस दिखावे का वास्तव में कोई लाभ नहीं मिलता। जो दिखावा करता है वह वास्तव में अपने आपको ठगता है। मंडी के पड्डल मैदान में आयोजित तीन दिवसीय भक्ति सत्संग के दूसरे दिन शनिवार को भी हजारों की तादाद में लोग ज्ञान की गंगा में डुबकी लगाने पहुंचे। सुधांशु महाराज ने श्रद्धालुओं से विश्व कल्याण के लिए कार्य करने का आह्वान किया। सुधांशु महाराज ने भीड़ को संबोधित करते हुए कहा कि उन्होंने कहा कि अशांत मन से ईश्वर का ध्यान करने से ईश्वर नहीं मिलता है। आज का मनुष्य नकली जीवन जी रहा है। उनकी कथनी एवं करनी में समानता नहीं होती है।
लोग प्याज, लहसुन खाने से परहेज करते हैं, लेकिन रिश्वत का धन खाने से उन्हें कोई परहेज नहीं है। रिश्वत लेकर कोई
व्यक्ति धन नहीं, बल्कि पाप कमाता है। पड्डल मैदान में भारी गर्मी के बावजूद भारी संख्या
में श्रद्धालुओं ने सत्संग में
भाग लिया।

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