
शिलाई (सिरमौर)। तहसील शिलाई और उपतहसील रोहनाट में किसी व्यक्ति या फर्म को खनन पट्टे जारी नहीं हैं, बावजूद इसके क्षेत्र में अवैध खनन धड़ल्ले से हो रहा है। भले ही यहां की खनन संपदा बाहरी बाजार के लिए कम निकाली जाती हो लेकिन यहां निर्माण कार्यों में खनन संपदा का बेरोकटोक धड़ल्ले से प्रयोग हो रहा है। अवैज्ञानिक ढंग से हो रहे खनन के कारण जल स्तर भी गिरता जा रहा है।
शिलाई तहसील के तहत सिंचाई विभाग की 65 प्रवाह पेयजल लाइनें हैं। रोहनाट उपतहसील में 25 प्रवाह पेयजल स्कीमें ग्रामीणों की प्यास बुझा रही है। लेकिन इनमें हर साल पानी कम हो रहा है। क्षेत्र में सैकड़ों प्राकृतिक बावड़ियों और कुओं का जल स्तर भी काफी गिर चुका है। एक दशक पूर्व यह प्राकृतिक स्रोत पानी से लबालब भरे रहते थे। विशेषज्ञ इसका प्रमुख कारण अवैज्ञानिक अवैध खनन को जिम्मेवार ठहरा रहे हैं। गत दिनों सोलन-मिनस मार्ग पर डाहर से रोहनाट तक सड़क सोलिंग में विभागीय अधिकारियों के सामने जमकर खनन किया गया। इस काम के लिए दूर से पत्थर आना था लेकिन मौके पर सड़क की सोलिंग के लिए पत्थर सड़क के ऊपरी भाग से ही निकाला गया।
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दर्जनों कूहलें एवं घराट चढ़े खनन की भेंट
पशोग और छुरडू खड्ड की पुश्तैनी कूहल बंद होने से मानल क्षेत्र की दो सौ बीघा भूमि बंजर हो गई है। चामरा मौहराड़ सड़क के मलबे से कुसेणू गांव के दो पुश्तैनी घराट और कूफर तालाब कुसेणू की सिंचाई कूहल भी क्षतिग्रस्त पड़ी है। इसी तरह क्षेत्र की दर्जन कूहलें प्राचीन घराट अवैज्ञानिक और अवैध खनन से खत्म हो चुके हैं। डाहर से रोहनाट सड़क की सोलिंग के लिए निकाले गए पत्थरों के चलते बरसात के मौसम में ल्हासे गिरने से रोहनाट की दर्जनों सिंचाई कूहलों के ध्वस्त होने का खतरा है।
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अधिकारी करते हैं कार्रवाई
जिला खनन अधिकारी संजीव शर्मा ने कहा कि हर विभाग को सरकार ने अवैध खनन रोकने तथा खनन माफिया पर कार्रवाई करने का अधिकार दिया है। विभाग सालभर समय-समय पर कार्रवाई भी करता है।
वनमंडल अधिकारी अभिलाश दामोदरण का कहना है कि वन विभाग हर साल खनन माफियाओं के खिलाफ कार्रवाई कर लाखों रुपये जुर्माना वसूलता है। लेकिन अवैध खनन पर तभी रोक लगेगी जब सभी विभाग एक साथ मिलकर कार्य करेंगे
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पर्यावरण का बढ़ रहा खतरा : डा.जोशी
नाहन (सिरमौर)। जिला पर्यावरण सोसाइटी के अध्यक्ष डा. सुरेश जोशी का कहना है कि अवैध खनन पर्यावरण के लिए गंभीर संकट है। इसके दूरगामी परिणाम धरती के जीवों को भुगतने होंगे। पर्यावरण सुरक्षा को लेकर कड़े कानून बनाने की जरूरत है अन्यथा पेयजल संकट से जूझना पड़ेगा।
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भविष्य में झेलना होगा भारी जलसंकट
नाहन (सिरमौर)। प्रदेश लघु उद्योग भारती के अध्यक्ष तजेंद्र गोयल ने कहा कि जल का खजाना हिमालय में हो रहे खनन से भविष्य में पीने के पानी का भारी संकट पैदा करेगा। पर्यावरण संरक्षण के लिए अभी से कदम नहीं उठाए तो गंभीर परिणाम भुगतने होंगे।
