अवैध कब्जाधारकों को कुछ दिन की राहत

मंडी। मंडी शहर में सरकारी भूमि पर अवैध कब्जे हटाने की मुहिम फिलहाल कुछ दिन के लिए रुक गई है। आगे की कार्रवाई उच्च न्यायालय के निर्देशों के आने के बाद ही शुरू होगी। मंगलवार को नगर परिषद की ओर से अब तक की कार्रवाई की रिपोर्ट अदालत में पेश की जानी थी, मगर इसपर मंगलवार को सरकारी पक्ष की ओर से ही दलीलें पेश की गईं। नगर परिषद की ओर से अब बुधवार को जहां अवैध कब्जे हटाने के बारे में की गई कार्रवाई की रिपोर्ट अदालत में पेश की जानी है। इस प्रक्रिया के चलते मंडी शहर में सरकारी भूमि से अवैध कब्जे हटाने की मुहिम थम गई है। जिससे अवैध कब्जाधारकों ने चैन की सांस ली है। वहीं, नगर परिषद की इस मुहिम से सफाई कामगार वाल्मीकि समुदाय के लोग सहमे से हैं। पिछले 50 साल से मंडी शहर में सफाई व्यवस्था का जिम्मा संभालने वाले इन लोगों को सरकार की ओर से अभी तक आवासीय सुविधा मुहैया नहीं करवाई गई है। इनके द्वारा बनाए गए आवास राजस्व रिकार्ड में दर्ज नहीं हो पाए हैं। ऐसे में नप की मुहिम की गाज इन पर गिर सकती है। हालांकि, कई संगठनों ने सफाई कामगारों का पक्ष उच्च न्यायालय में रखने की नगर परिषद और सरकार से मांग की है। माकपा के जिला सचिव भूपेंद्र सिंह का कहना है कि सफाई कर्मियों के आवास अवैध कब्जे नहीं हैं। ये लोग तो 1950 से यहां रह रहे हैं। कई सरकारों के मुख्यमंत्रियों ने इनकी बस्ती में आकर इनके कब्जों को नियमित करने की घोषणाएं की हैं, मगर उस पर अमल नहीं हो पाया है। इधर, नप अध्यक्ष सुशीला सोंखला का कहना है कि नगर परिषद उच्च न्यायालय के आदेशों की अनुपालना करने जा रही है। इस बारे में अदालत के जो भी निर्देश होंगे, उनकी अनुपालना की जाएगी।

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