
हल्द्वानी। ‘मनहूस समाजी ढांचों में, जब जुर्म न पाले जाएंगे। जब हाथ न काटे जाएंगे, जब सिर न उछाले जाएंगे। जेलों के बिना जब दुनिया की सरकार चलाई जाएगी, वो सुबह कभी तो आएगी।’ कुछ इसी तरह के विचारों के साथ अल्मोड़ा निवासी जेएनयू के छात्र हेम मिश्रा की गिरफ्तारी का फेसबुक पर भारी विरोध शुरू हो गया है। हेम को माओवादी कुरियर के आरोप में महाराष्ट्र में शुक्रवार को गिरफ्तार किया गया है। गिरफ्तारी के बाद उत्तराखंड मेें भी खुफिया एजेंसियां अलर्ट हो गई हैं। उसकी यहां गतिविधियों और संपर्कों की तलाश की जा रही है, क्योंकि 2009 में जेएनयू जाने से पहले वह कुमाऊं में काफी सक्रिय था। फेसबुक पर विरोध करने वालों पर भी एजेंसियां नजर रख रही हैं।
खुफिया सूत्रों के अनुसार हेम मिश्रा वामपंथी निगरानी कमेटी से जुड़ा था, जिसके रूप में वह लगातार सक्रिय था। हाल में महाराष्ट्र में हुए एक एनकाउंटर की जांच के लिए गठित फैक्ट फाइंडिंग कमेटी में शामिल होकर वह गढ़चिरौली गया था, जहां उसे माओवादी प्रचार सामग्री ले जा रहे एक अन्य व्यक्ति के साथ गिरफ्तार किया गया, इसके बाद उसे कोर्ट में पेश कर दस दिन की रिमांड में भेजा गया है, जहां उससे पूछताछ की जा रही है। ये सूचना मिलने के बाद उत्तराखंड में भी खुफिया और सुरक्षा एजेंसियों ने अपने स्तर पर मामले की जांच शुरू कर दी है। वह लंबे समय तक उत्तराखंड के विभिन्न क्षेत्रों में सक्रिय वामपंथी रहा। कई वामपंथी संगठनों से उसके संबंध थे। यहां उसकी गतिविधियां और संपर्कों की जांच शुरू कर दी गई है। अल्मोड़ा से भी उससे जुड़ी तमाम जानकारियां जुटाई जा रही हैं। खुफिया एजेंसियों के अनुसार 2009 में जेएनयू जाने से पहले वह यहां बंदी रिहाई कमेटी में सक्रिय सदस्य था। उससे पूछताछ के लिए एक विशेष टीम भी महराष्ट्र भेजे जाने की तैयारी की जा रही है। डीआईजी कुमाऊं जीएन गोस्वामी ने बताया वहां की एजेंसियों से इनपुट मिलने के बाद उससे जुड़े तमाम मुद्दों की विस्तृत जांच की जाएगी।
