अलकनंदा ने खोखला किया चौरास झूला पुल

श्रीनगर। अलकनंदा नदी से हो रहे लगातार कटाव के चलते चौरास झूला पुल खतरे की जद आ गया है। पुल की एक ओर की नींव खोखली हो चुकी है। पुल का जल्द ट्रीटमेंट नहीं किया गया तो चौरास पुल के अस्तित्व को खतरा हो सकता है। विवि चौरास परिसर, विवि की कालोनियां सहित सैकड़ों गांवों को श्रीनगर से जोड़ने का पुल एकमात्र साधन है।
अलकनंदा नदी के कटाव से कई पौराणिक मंदिर, चौरास परिसर को जोड़ने वाली सड़क एवं चौरास स्टेडियम का काफी हिस्सा नदी में समा चुका है। अब चौरास पुल पर खतरा मंडरा रहा है। नदी के तेज बहाव से लगातार कटाव हो कटाव हो रहा है। इससे चौरास झूला पुल की नींव खोखली हो चुकी है। इस पुल से हर रोज चौरास परिसर के हजारों छात्रों के साथ ही सैकड़ों दुपहिया वाहन आवाजाही करते हैं। गढ़वाल विश्वविद्यालय के भूगर्भ वैज्ञानिक प्रो. एमपीएस बिष्ट ने बताया कि किसी भी पुल के लिए यह हिस्सा महत्वपूर्ण होता है। पुल की नींव खोखली होना खतरनाक है। जल्द इसका ट्रीटमेंट नहीं किया गया तो पुल का अस्तित्व खतरे में पड़ जाएगा।
चौरास झूला पुल विश्वविद्यालय के पांच हजार से अधिक छात्रों के साथ ही चौरास सहित सैकड़ों गांवों को श्रीनगर से जोड़ने का मुख्य साधन है। प्रशासन का कहना है कि पुल के एबिटमेंट की मरम्मत का प्रस्ताव बना लिया गया है। शीघ्र ही लोक निर्माण विभाग द्वारा उस पर कार्य शुरू कर दिया जाएगा।
एबिटमेंट किसी भी पुल के लिए महत्वपूर्ण भाग होता है। एबिटमेंट के नीचे नींव का खोखला हो जाना पुल के अस्तित्व को खतरा पैदा करता है। इसका तुरंत ट्रीटमेंट किया जाना चाहिए। – प्रो. एमपीएस बिष्ट, भूगर्भशास्त्री गढ़वाल विश्वविद्यालय
एबिटमेंट के ट्रीटमेंट के लिए प्रस्ताव बनाया है। शीघ्र ही लोक निर्माण विभाग उस पर कार्य शुरू करेगा। – रजा अब्बास, उपजिलाधिकारी श्रीनगर
झूला पुल से जुड़ी हैं अपेक्षाएं
श्रीनगर। एक वर्ष पूर्व निर्माणाधीन चौरास पुल टूटने से चौरास निवासियों को काफी निराशा हुई थी। वहां जमीनों की कीमत में भी काफी गिरावट आई थी। नगर क्षेत्र को जोड़ने के लिए झूला पुल ही एकमात्र साधन है। इससे स्थानीय बाशिंदों की दिनचर्या जुड़ी है। पुल को नुकसान पहुंचा तो चौरास क्षेत्र के निवासी मानसिक रूप से टूट जाएंगे। क्योंकि यही पुल श्रीनगर से जोड़ने का एकमात्र साधन है।

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