
शनिवार को जब मास्टर प्लान को एमडीडीए के पार्किंग स्थल पर चस्पा किया गया तो इसे देखकर लोग चौंक गए।
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इस उल्टे-पुल्टे प्लान ने सैकडों लोगों को पता ही बदल डाला है। मास्टर प्लान में बालावाला को कृषि क्षेत्र दिखाया गया है, जबकि इस भूमि पर मकान बन चुके हैं। सैनिक नगर यहीं आबाद है। लेकिन प्लान के मुताबिक यहां अभी खेती हो रही है।
कृषि इलाका को बताया व्यावसायिक
मास्टर प्लान का बारीकी से जायजा ले रहे शहर के रिटायर्ड प्रशासनिक अफसर जीबीएस सजवाण को यह खामी मिली तो उनका मूड खराब हो गया। मियांवाला की तरफ इशारा करके बोले कि यह कृषि का इलाका है, इसे व्यावसायिक बता दिया।
इसी तरह भूखंड का यह हिस्सा रिहायशी क्षेत्र है, इसे भी व्यावसायिक बताया जा रहा है। बोले कि अगर कायदे से सर्वे कराकर प्लान तैयार किया जाता तो ये गड़बड़ियां न होतीं। टिब्बा नालापानी के पास जगातखाना के आसपास जंगल है और कृषि क्षेत्र है। यहां विश्वविद्यालय लिखा गया है।
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इसी तरह आर्किटेक्ट राकेश कुमार बोले कि यहां जंगल में कौन सा विश्वविद्यालय आ गया? सजवाण भी जंगल में विश्वविद्यालय खोजने के चक्कर में 15 मिनट तक परेशान रहे। बोले कि सब पैसा और सिफारिश का खेल है।
अधिवक्ता एलएस नेगी के साथ कुछ लोग कारगी क्षेत्र को अपरिभाषित एरिया में डाल देने से उलझन में थे। मास्टर प्लान में रिस्पना से आईएसबीटी तक सड़क के दोनों तरफ आवासीय क्षेत्र बताया गया है।
लोगों का कहना है कि दोनों तरफ व्यावसायिक प्रतिष्ठान बने हैं और बन रहे हैं। इस क्षेत्र को व्यावसायिक क्षेत्र में डाला जाना चाहिए था। लोगों ने नाराजगी जाहिर की कि बिना स्पॉट सर्वे कराए मास्टर प्लान तैयार किया गया है।
जोनल प्लान में ठीक होंगी गड़बड़ियां
एमडीडीए के उपाध्यक्ष आर मीनाक्षी सुंदरम ने बताया कि अगर मास्टर प्लान में कोई खामियां बताएगा तो उसे जोनल प्लान में दूर किया जाएगा। जोनल प्लान बहुत पहले से तैयार है। जरूरत पर इसे अपडेट कर लिया जाएगा।
उन्होंने बताया कि जोनल प्लान के लिए भी आपत्तियां मांगी जाएंगी। लोग की दिक्कतों का समाधान किया जाएगा। जोनल प्लान की खानापूरी करने में एक महीना लग जाएगा। यह प्लान बहुत ही बारीकी से तैयार किया गया है।
उन्होंने बताया कि जोनल प्लान में एक-एक खसरा का ब्योरा मिलेगा। जोनल प्लान को ऑन लाइन किया जाएगा लोग अपने घर-जमीन की स्थिति नेट पर देख सकेंगे। उपाध्यक्ष ने बताया कि अब मास्टर प्लान पर कोई आपत्ति नहीं ली जाएगी।
मास्टर प्लान के खिलाफ कोर्ट जाने की तैयारी
मास्टर प्लान के खिलाफ कोर्ट जाने की तैयारी शुरू हो गई है। इस संबंध में उत्तराखंड आर्किटेक्ट, इंजीनियर्स, ड्राफ्टमैन एसोसिएशन की शनिवार रात दून क्लब में हुई आपात बैठक में मास्टर प्लान पर सख्त एतराज किया गया।
बैठक में कहा गया कि प्लान में पुरानी गलतियां नहीं सुधारी गईं। आवासीय, व्यावसायिक और कृषि क्षेत्र में घालमेल किया गया है। बैठक में एसोसिएशन पदाधिकारियों ने मास्टर प्लान के एक-एक बिंदु का बारीकी से अध्ययन किया।
जंगल बना आवासीय क्षेत्र
कहा कि एमडीडीए पार्क से रिस्पना नदी तक जंगल है, जिसे आवासीय बताया गया है। मोहकमपुर में रेल पटरी तक आवासीय दिखा दिया। इसे बहुत गैर-जिम्मेदाराना तरीके से तैयार किया गया है। ‘प्लानिंग में बेसिक कांसेप्ट ही गलत है।’ मास्टर प्लान के खिलाफ कोर्ट में जनहित याचिका के संबंध में विचार-विमर्श किया जा रहा है।
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एसोसिएशन के महासचिव डीएस राणा ने बताया कि शासन से तो बात करने के लिए नहीं जाएंगे। समस्या के समाधान के लिए दूसरे विकल्प हैं। मास्टर प्लान वर्ष 2001 में तैयार होना था। लेकिन वर्ष 2005, 2008 और अब 2013 में भी मुकम्मल नहीं हो पाया है।
