अभिव्यक्ति की आजादी आरटीआई बिना अधूरी : भीम

मंडी। राज्य सूचना आयुक्त भीमसेन ने कहा कि आरटीआई एक्ट आम आदमी से जुड़ा हुआ है। आयोग अधिकारियों एवं कर्मचारियों की कार्यशैली में पारदर्शिता लाने, कार्यप्रणाली में दक्षता लाने के अलावा जवाबदेह और भ्रष्टाचार मुक्त प्रशासन बनाने के लिए कृतसंकल्प है। पत्रकारों से बात करते हुए उन्होंने कहा कि संविधान में प्रदत्त अभिव्यक्ति की आजादी सूचना के अधिकार के बिना अधूरी है। अब गैर सरकारी संस्थाएं भी आरटीआई के दायरे में आ गई हैं। यदि कोई संस्था सूचना देने में आनाकानी करती है तो उसके खिलाफ कोई भी आवेदक सादे कागज पर शिकायत कर सकता है। आम जनता अभी भी सूचना लेने के अपने अधिकार से अनजान है। फिर भी प्रदेश देश के उन राज्य में शीर्ष पर है जहां लोग इस एक्ट के तहत सूचनाएं प्राप्त कर भ्रष्टाचार मुक्त प्रशासन बनाने में अपना योगदान दे रहे हैं। किसी भी पब्लिक अथारिटी कार्यालय में 3 अधिकारियों की इस एक्ट के तहत नियुक्ति आवश्यक है, जो आवेदक को सूचना देने के लिए बाध्य होंगे। आरटीआई एक्ट के सेक्शन-3 के तहत प्रत्येक नागरिक को सूचना मांगने का अधिकार है। सूचना न्यायालय की मनाही, देश की सुरक्षा से जुड़े संवेदनशील मामलों से संबंधित नहीं होनी चाहिए। सूचना देने में आनाकानी और देरी पर सूचना अधिकारी को व्यक्तिगत स्तर पर पेनल्टी लगाई जाती है, जो अढ़ाई सौ रुपये प्रतिदिन के हिसाब से अधिकतम 25 हजार रुपये तक हो सकती है। 2005 से लेकर अभी तक 169 मामलों में 2 लाख 59 हजार 2 रुपये हर्जाना और 85 मामलों में 5 लाख 61 हजार 450 रुपये का जुर्माना वसूला गया है। इस मौके पर राज्य सूचना सचिव एसएस गुलेरिया भी मौजूद रहे।

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