
देहरादून। केदारघाटी में आई आपदा प्रकृति की चेतावनी का संकेत है। यह कहना है हेस्को के संस्थापक पर्यावरणविद पद्मश्री डा. अनिल जोशी का। इंडिया मीडिया सेेंटर की ओर से आयोजित गोष्ठी में जोशी ने कहा कि अब भी लोग और सरकार नहीं चेते को परिणाम और भी विनाशकारी हो सकते हैं।
रविवार को राजपुर रोड स्थित एक होटल में आयोजित गोष्ठी में जोशी ने जंगलों और नदियों के बिगड़ते स्वरूप पर चिंता जताते हुए इस संबंध में ठोस नीति बनाने की जरूरत जताई। कहा कि इसमें सरकारी पहल के साथ ग्रामीण और शहरी जनता को भी जोड़ा जाना चाहिए। जोशी ने आपदा प्रबंधन तंत्र की मजबूती के लिए संगठन बनाकर कार्य करने पर जोर दिया। उत्तराखंड इंडस्ट्रीज एसोसिएशन के अध्यक्ष पंकज गुप्ता ने कहा कि राज्य गठन के वक्त पलायन 11 फीसदी था। कुछ समय से यह घटने लगा था, लेकिन आपदा ने सब कुछ तबाह कर दिया। गुप्ता ने कहा कि अब लगभग दस लाख लोगों के सामने रोजी-रोटी का संकट बन गया है। ओएनजीसी की मुख्य प्रबंधक मधुरिका वर्मन ने आपदा के प्रति जागरूकता पर जोर दिया। आपदा की इस घड़ी में ओएनजीसी की ओर से राहत और पुनर्वास कार्यों में हर संभव मदद की जा रही है।
इस दौरान यूकॉस्ट के महानिदेशक राजेंद्र प्रसाद डोभाल, अनूप नौटियाल, अनिल सती आदि ने विचार रखे। संचालन प्रेम सिंह बिष्ट ने किया।
