
शिमला। ऑडियो और वीडियो सीडी की जांच के लिए प्रदेश पुलिस को अब अन्य राज्यों की लैब पर निर्भर नहीं होना पड़ेगा। प्रदेश पुलिस ने वॉयस सैंपल टेस्ट के लिए स्पैक्ट्रोग्राफ (वॉयस एनालाइजर मशीन) खरीदने का निर्णय लिया है। पुलिस मुख्यालय ने प्रदेश सरकार के माध्यम से केंद्र को 55 लाख का प्रपोजल भेजा है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि यदि अनुमति मिली तो जुन्गा स्थित फोरेंसिक लैब में वॉयस टेस्ट लैब स्थापित की जाएगी। फिलहाल, पुलिस को वॉयस सैंपल टेस्ट के लिए चंडीगढ़, हैदराबाद और गुजरात लैब की सेवाएं लेनी पड़ती हैं। सैंपल का रिजल्ट आने में कम से कम एक माह लगता है। उनका कहना है कि अपनी लैब होने से समय पर रिपोर्ट आएगी और उसकी प्रमाणिकता पर भी किसी तरह का सवाल नहीं उठाया जा सकेगा। पुलिस विभाग ने यह प्लान केंद्र को आधुनिकीकरण स्कीम के तहत भेजा है। इसमें 60 प्रतिशत राशि केंद्र सरकार देती है। 40 प्रतिशत राशि राज्य सरकार को देनी होती है।
अब तक के चर्चित सीडी प्रकरण
प्रदेश में कई चर्चित सीडी कांड के मामले प्रकाश में आए हैं। इनमें पूर्व मुख्यमंत्री प्रेम कुमार धूमल और पूर्व डीजीपी डा. डीएस मन्हास के कथित वार्तालाप के अलावा मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह और उनकी पत्नी प्रतिभा सिंह का सीडी मामला चर्चाओं में रहा। शिमला से भाजपा सांसद वीरेंद्र कश्यप की वीडियो सीडी का मामला भी चर्चित रहा। इन मामलों में पुलिस ने चंडीगढ़ और हैैदराबाद सहित कई प्रयोगशालाओं में वॉयस सैंपल टेस्ट करवाए। एक मामले में तो दो से अधिक बार अलग-अलग लैब में जांच करवानी पड़ी। दोनों के नतीजों में भी फर्क आया।
पुलिस आधुनिकीकरण योजना के तहत प्लान भेजा गया है। यदि मंजूरी मिली तो वॉयस सैंपल टेस्ट हिमाचल में ही हो पाएगा। इसके लिए अन्य राज्यों की लैब पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा।
– संजय कुमार, डीजीपी; हिमाचल पुलिस।
